छह सौ बकायेदारों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट व एक हजार से अधिक को जारी हुई नोटिस

खगड़िया : डिफॉल्टर बकायेदारों के पास फंसी करोड़ों रुपये की वसूली के लिये करीब छह सौ के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट तथा एक हजार से अधिक लोगों के विरुद्ध धारा सात के तहत नोटिस जारी किया गया है. जिला निलाम पत्र शाखा के प्रभारी पदाधिकारी आदित्य कुमार पियूष ने इन बकायेदारों के विरुद्ध जारी नोटिस व […]

खगड़िया : डिफॉल्टर बकायेदारों के पास फंसी करोड़ों रुपये की वसूली के लिये करीब छह सौ के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट तथा एक हजार से अधिक लोगों के विरुद्ध धारा सात के तहत नोटिस जारी किया गया है. जिला निलाम पत्र शाखा के प्रभारी पदाधिकारी आदित्य कुमार पियूष ने इन बकायेदारों के विरुद्ध जारी नोटिस व वारंट को स्थानीय थाने को भेजते हुए कार्रवाई करने को कहा है. विभागीय सूत्र के मुताबिक बकायेदारों से राशि वसूली में तेजी लाने के उद्देश्य से सख्ती बरती जा रही है.

हाल के दिनों में तीन बकायेदारों को राशि नहीं लौटाने के जेल भी भेजा गया है. बताया जाता है कि बैंक, परिवहन, उत्पाद, राजस्व, विद्युत सहित अन्य विभागों ने एक अरब से अधिक रुपये की वसूली 11 हजार 386 बकायेदारों के विरुद्ध सर्टिफिकेट केस दर्ज कराया था. लेकिन इन बकायेदारों से वसूली की स्थिति अच्छी नहीं है. इधर सैकड़ों बकायेदारों पर शिकंजा कसते हुए उनके विरुद्ध वारंट जारी किये गये हैं.
लगातार बढ़ रही है डिफॉल्टरों की संख्या
विभागीय जानकारी के मुताबिक जिले में वसूली की स्थिति जहां बेहद खराब है, वहीं डिफॉल्टर की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. विभागीय आंकड़े के मुताबिक बकायेदारों से महज 1.57 प्रतिशत राशि ही वसूल हो पाई है. जबकि औसतन प्रतिदिन दो से तीन लोगों के विरुद्ध सर्टिफिकेट केस दर्ज हो रहे हैं.
विभागीय आंकड़े के मुताबिक 31 मार्च 2018 के पहले 6115 लोगों पर सर्टिफिकेट केस दर्ज हुए थे. लेकिन 1 अप्रैल 2019 तक यह आंकड़ा 10 हजार 374 तक पहुंच गया.
वहीं 1 अप्रैल से 31 दिसंबर तक 11 हजार 386 लोगों के विरुद्ध सर्टिफिकेट दर्ज कराये गये हैं. विभागीय आंकड़ा यह साफ बता रहा है कि बीते 9 माह
में एक हजार से अधिक बकायेदारों के विरुद्ध सर्टिफिकेट केस दर्ज किया गया है.
16 प्रतिशत से अधिक ऋण खाते हो चुके हैं एनपीए
बैंकों इन दिनों दोहरी परेशानी से घिरा हुआ है. पहली परेशानी तो यह है कि पुराने कर्जदारों से वसूली नहीं होने के कारण उन पर सर्टिफिकेट केस दर्ज कराना पड़ा. वहीं दूसरी परेशानी यह है कि काफी संख्या में नये ऋण खाते भी खराब यानी एनपीए हो रहे हैं.
पिछले साल के आरंभ में एनपीए खातों में करीब 150 करोड़ रुपये फंसी थी जो बढ़कर कुछ माह पहले दो सौ करोड़ से ऊपर हो गया है. सूत्र बताते हैं कि करीब 16 प्रतिशत ऋण की राशि एनपीए खातों में फंसी हुई है. जो कि छोटी-मोटी बात नहीं है. लगातार एनपीए हो लोन एकाउन्ट से अधिकांश बैंक परेशान है.
सूत्र बताते हैं कि को-ऑपरेटिव बैंक, पीएनबी, ग्रामीण बैंक,बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के काफी लोन एकाउंट एनपीए हो चुके हैं.ऐसे एकाउंट में बैंकों के अरबों रुपये फंसे हुए हैं. बैंकों ने हजारों कर्जदारों पर बकाये ऋण की वसूली के लिये सर्टिफिकेट केस दर्ज कराये गये हैं, सैकड़ों को बैंकों ने नोटिस भी जारी किया है.
कहते हैं प्रभारी पदाधिकारी
एक अप्रैल से 31 दिसंबर के बीच एक हजार से अधिक लोगों के विरुद्ध 15.31 करोड़ से अधिक की वसूली के लिये अलग-अलग बैंकों ने जिला निलाम-पत्र शाखा में सर्टिफिकेट केस दर्ज कराया है. रिकार्ड खोलकर कर्जदारों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है. कइयों के विरुद्ध वारंट भी जारी किये गये हैं. राशि वसूली की में तेजी लाने के उद्देश्य से सख्ती बरती जा रही है.
आदित्य कुमार पियूष, प्रभारी पदाधिकारी निलाम-पत्र शाखा.

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