बेलदौर : डुमरी पुल के समीप कोसी नदी पर जुगाड़ पुल के निर्माण को हरी झंडी मिल गयी है. जुगाड़ पुल की बंदोवस्ती के लिये खुली डाक में बोली लगायी गयी. अग्रहण यातायात समिति के राजबली चौधरी ने खुली डाक में सबसे ज्यादा 34 लाख की बोली लगा कर सैरात की बंदोबस्ती अपने नाम कर […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
बेलदौर : डुमरी पुल के समीप कोसी नदी पर जुगाड़ पुल के निर्माण को हरी झंडी मिल गयी है. जुगाड़ पुल की बंदोवस्ती के लिये खुली डाक में बोली लगायी गयी. अग्रहण यातायात समिति के राजबली चौधरी ने खुली डाक में सबसे ज्यादा 34 लाख की बोली लगा कर सैरात की बंदोबस्ती अपने नाम कर लिया. हालांकि प्रावधान के अनुसार बंदोबस्ती की ऊंची बोली का 50 फीसदी राशि तत्काल जमा पड़ेगा. जानकारी के अनुसार मंगलवार को पूर्व से निर्धारित कार्यक्रम के तहत उसराहा एवं सोनवर्षा घाट के अस्थाई सैरात की बंदोबस्ती को लेकर बंदोबस्तधारकों ने जिला समाहरणालय के सभाकक्ष में दूसरे दिन भी बोली लगायी.
खुली डाक में कुल 9 नाव संचालकों ने भाग लिया. सोमवार को सबसे ऊंची बोली मैदनीनगर की राधा देवी ने 21 लाख तक की लगा कर सबसे आगे थी. लेकिन फैसला नहीं हो पाने के कारण डाक दूसरे दिन तक टाल दिया गया. मंगलवार को सैरात बंदोबस्ती की सबसे ऊंची बोली 34 लाख रुपये लगाकर राजबली चौधरी ने दूसरी बार कोसी नदी पर जुगाड़ पुल बनाने का अधिकार हासिल कर लिया. प्रावधान के मुताबिक तय समय सीमा के अंदर डाक की आधी राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं की जाती है तो दूसरे स्थान पर बोली लगाने वाले को निर्धारित राशि जमा करने के लिये बुलाया जायेगा.
सरकारी खजाने में जमा करना होगा 17 लाख
इस बार खुली डाक में राजबली चौधरी ने सबसे ऊंची बोली 34 लाख की लगायी है. जिसके बाद अब इन्हें 17 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा करना होगा. इसके बाद कम से कम 17 दिन जुगाड़ पुल बनाने में समय लगेगा. जानकारों की मानें तो बीते वर्ष उक्त अस्थाई सैरात की बंदोबस्ती 3 माह के लिये 50 लाख में राजबली चौधरी ने ही अपनी पत्नी हिना देवी के नाम से लिया था. कोसी कटाव एवं अन्य बाधा उत्पन्न होने के कारण बंदोबस्तधारी को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा था.
2017 में भी आधी राशि पर अड़ा था प्रशासन
बीते वर्ष 2017 में सैरात बंदोबस्ती में भी बाधा उत्पन्न हुई थी. लेकिन बाद में निर्धारित आधी राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं हो पाया है. जिला प्रशासन राशि जमा करने पर अड़ा हुआ जबकि बंदोवस्तधारी को पैसे का इंतजाम नहीं हो पाया था. इसके बाद जिला प्रशासन ने कुछ समय दिया था. जिसमें निर्धारित राशि जमा करने के बाद जुगाड़ बनाने का आदेश दिया गया. इसके कारण देरी से जुगाड़ पुल पर आवागमन शुरू हुआ था. राशि जमा करने में देरी के कारण 15 फरवरी से 23 मई 2017 तक जुगाड़ पुल का संचालन किया गया था.
इतमादी बारूण के राजकुमार सिंह व गोरेलाल सहनी ने बताया कि खुली डाक में भाग लेने के लिये उसराहा घाट की ओर से 2 एवं सोनवर्षा घाट की ओर से 7 लोगो ने निर्धारित तिथि को अस्थाई रूप से 3 माह के सैरात बंदोबस्ती के लिये तय राशि साढ़े चार लाख का दस प्रतिशत 45 हजार रुपये जमा कर एनआर कटाया.
नाव पर सवारी से 15 दिन में मुक्ति मिलने के आसार
बीते सात बरसों से डुमरी पुल क्षतिग्रस्त रहने के कारण लोगों का आवागमन में संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है. इसके बाद स्टील पाइल ब्रिज बनाया गया लेकिन वह भी कोसी की तेज धारा में बह गया. इसके बाद नावों को जोड़ कर जुगाड़ पुल के सहारे कोसी नदी पार करने की तरकीब निकाली गयी. इसके तहत नावों को जोड़ कर कोसी नदी पर अस्थायी जुगाड़ पुल का निर्माण कराया जाता है. इसके लिये अब बंदोवस्ती हो जाने के बाद जल्द ही जुगाड़ पुल का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है. इसके बाद लोगों को आवागमन में काफी राहत मिलने की उम्मीद है. साथ ही नाव की सवारी से भी तत्काल मुक्ति मिल जायेगी. जिससे लाखों की आबादी लाभान्वित होगी.