सरस्वती पूजा 22 जनवरी को, तैयारी जोरों पर
खगड़िया : जब खेतों में सरसों खिल रहे हों, आम की डाली मंजर से झूल रही हों, जब पतंगें आसमान में लहराती हों, मौसम में मादकता छा जाती हो, तो वसंत ऋतु कहलाती है. सिर्फ खुसगवार मौसम, खेतों में लहराती फसलें व पेड़-पौधों में फूटती नयी कोपलें ही वसंत ऋतु की विशेषता नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उल्लास का, प्रेम के चरमोत्कर्ष का, ज्ञान के पदार्पण का, विद्या व संगीत की देवी के प्रति समर्पण का त्योहार भी वसंत ऋतु में मनाया जाता है. इसी दिन जगत की नीरसता को खत्म करने व जीवों में विद्या व संगीत का संचार करने के लिए देवी सरस्वती पैदा हुई. इसलिए इस दिन शैक्षणिक व सांस्कृतिक संस्थानों में मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा की जाती है. देवी से प्रार्थना की जाती है कि वे अज्ञानता का अंधेरा दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करें.
क्या है वसंत पंचमी : माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी कहा जाता है. माना जाता है कि विद्या, बुद्धि व ज्ञान की देवी सरस्वती का आविर्भाव इसी दिन हुआ था. इसलिए यह तिथि वागीश्वरी जयंती व श्री पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है. हिंदुओं के पौराणिक ग्रंथों में भी इस दिन को बहुत ही शुभ माना गया है. हर नये काम की शुरुआत के लिए यह बहुत ही मंगलकारी माना जाता है.
वसंत पंचमी की पौराणिक कथा : माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने श्रृष्टि की रचना तो कर दी लेकिन वे इसकी नीरसता को देखकर असंतुष्ट थे. फिर उन्होंने अपने कमंडल से जल छिटका जिससे धरा हरी-भरी हो गई व साथ ही विद्या, बुद्धि, ज्ञान व संगीत की देवी प्रकट हुई. ब्रह्मा जी ने आदेश दिया कि इस श्रृष्टि में ज्ञान व संगीत का संचार कर जगत का उद्धार करो. तभी देवी ने वीणा के तार झंकृत किए जिससे सभी प्राणी बोलने लगे, नदियां कलकल कर बहने लगी हवा ने भी सन्नाटे को चीरता हुआ संगीत पैदा किया.
तभी से बुद्धि व संगीत की देवी के रूप में सरस्वती पूजी जाने लगी. मान्यता है कि जब सरस्वती प्रकट हुई तो भगवान श्री कृष्ण को देखकर उनपर मोहित हो गई व भगवान श्री कृष्ण से पत्नी रुप में स्वीकारने का अनुरोध किया, लेकिन श्री कृष्ण ने राधा के प्रति समर्पण जताते हुए मां सरस्वती को वरदान दिया कि आज से माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी को समस्त विश्व तुम्हारी विद्या व ज्ञान की देवी के रूप में पूजा करेगा. उसी समय भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले देवी सरस्वती की पूजा की तब से लेकर निरंतर बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा लोग करते आ रहे है.
कैसे करेंगे वसंत पंचमी पूजा
संसारपुर गांव निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर ने बताया कि प्रात:काल स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें तत्पश्चात कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें. फिर मां सरस्वती की पूजा करें. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं. फिर माता का शृंगार कराएं माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं. प्रसाद के रूप में खीर अथवा दूध से बनी मिठाइयां चढ़ा सकते हैं. श्वेत फूल माता को अर्पण किये जा सकते हैं. विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करें.
पूजा की तैयारी में जुटे विद्यार्थी
वसंत पंचमी सरस्वती पूजा की तैयारी प्रारंभ हो चुकी हैं. सरकारी, निजी स्कूल, सार्वजनिक स्थल, के साथ- साथ अपने अपने घरों में छात्र-छात्रा विद्या की धनी मां सरस्वती की पूजन की तैयारियों को एकीकृत होकर योजना बना ली है. वहीं मूर्तिकार मां की प्रतिमा निर्माण करने में लगे हुए हैं. सरस्वती पूजा के अवसर कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है.
पूजा का शुभ मुहूर्त
वसंत पंचमी : 22 जनवरी 2018
पूजा का मुहूर्त : 07:17 से 12 बजकर 52 मिनट तक
पंचमी तिथि का आरंभ : 12 बजकर 41 मिनट तक (21 जनवरी 2018)
पंचमी तिथि समाप्त : 12 बजकर 52 मिनट (22 जनवरी 2018)
क्यों खास है वसंत पंचमी
•वसंत पंचमी के दिन को माता पिता अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की शुरुआत के लिए शुभ मानते हैं.
•बच्चों को उच्चारण सिखाने के लिहाज से भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है.
•छह माह पूरे कर चुके बच्चों को अन्न का पहला निवाला भी इसी दिन खिलाया जाता है.
•चूंकि वसंत ऋतु प्रेम की रुत मानी जाती है और कामदेव अपने बाण इस ऋतु में चलाते हैं.
इस लिहाज से अपने परिवार के विस्तार के लिए भी यह ऋतु बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसलिए बसंत पंचमी को परिणय सूत्र में बंधने के लिए भी बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है व बहुत से युगल इस दिन अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करते हैं.
•गृह प्रवेश से लेकर नये कार्यों की शुरुआत के लिए भी इस दिन को शुभ माना जाता हैं.
