बहनों ने भाई की कलाई पर बांधी राखी

उत्साह. भाई-बहन के प्रेम का त्योहार रक्षा बंधन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया खगडिया : येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महावला. तेन त्वामाभिबध्रामि रक्षे मा चल मा चल मंत्र के साथ सोमवार को शुभ मुहूर्त में बहनों ने अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधा. जिले में हर्षोल्लास के साथ रक्षा बंधन मनाया गया. […]

उत्साह. भाई-बहन के प्रेम का त्योहार रक्षा बंधन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

खगडिया : येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महावला. तेन त्वामाभिबध्रामि रक्षे मा चल मा चल मंत्र के साथ सोमवार को शुभ मुहूर्त में बहनों ने अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधा. जिले में हर्षोल्लास के साथ रक्षा बंधन मनाया गया. विभिन्न मंदिरों में काफी भीड़ उमड पड़ी. बहनें अपने भाई के कलाई में रक्षा सूत्र बांध कर आरती उतारी तथा मिठाई खिलाकर भगवान से दीर्घायु होने की कामना की. वहीं, भाई ने बहनों को मिठाई खिलाकर सुख दुख में साथ रहने का वचन दिया. भाई बहन का मधुर प्रेम मिलन का त्यौहार रक्षा बंधन सदियों से चली आ रही एक विशेष परंपरा है. भाई ने इस पवित्र अवसर पर बहनों को उपहार भेंट किया. जो स्नेह का प्रतीक हैं. भेंट स्वरूप पाक बहनें खुश हो गयी. सावन की अंतिम सोमवारी के दिन रक्षा बंधन घर घर में धूमधाम से मनाया गया.
रक्षा बंधन की पैराणिक कथा: पुराणों में वर्णन है कि एक बार देव व दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगा. भगवान इंद्र घबराकर गुरु बृहस्पति के पास गए और अपनी व्यथा सुनाने लगे. वहां पर बैठी इंद्र की पत्नी यह सब सुन रही थीं. उन्होंने एक रेशम का धागा मंत्रों की शक्ति से पवित्र कर अपने पति की कलाई पर बांध दिया. इंद्र को इस युद्ध में विजय प्राप्त हुई, तभी से लोगों को विश्वास हैं कि इंद्र को विजय इस रेशमी धागा पहनने से मिली थी. उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बांधने की प्रथा चली आ रही हैं. यह धागा ऐश्वर्य, धन, शक्ति, प्रसन्नता और विजय देने में पूरी तरह सक्षम माना जाता है.
शास्त्रों में उल्लिखित रक्षा बंधन :
महाभारत में रक्षा बंधन पर्व का उल्लेख किया गया है. जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं संकटों को कैसे पार कर सकता हूं. तब कृष्णा ने उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्यौहार मनाने की सलाह दी थीं. शिशुपाल का वध करते समय कृष्ण के तर्जनी में चोट आ गई तो द्रौपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर उनकी अंगुली पर बांध दी थी.
धागे से जुड़े हैं संस्कार : सनातन परम्परा से किसी भी शुभ कार्य या अनुष्ठान की पूर्णाहुति बिना रक्षा बांधे पूरी नहीं होती हैं. हाथों में धागे लपेटने के पीछे मान्यता है कि इससे उनका परिवार धन धान्य रहता है.

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