अजीत कुमार ठाकुर, कुरसेला महाशिवरात्री की रात कुरसेला हाट के दुकानदारो के लिये कयामत की रात बन गयी.आग चिंगारी से उठी लपटों ने दुकानदारों का जीवन आधार को जलाकर राख कर दिया. जले दुकानों के राख को देख दुकानदार महिलाएं दहाड़े मार विलाप कर बेसुध हो जा रही थी. सुबह का नजारा बेहद मार्मिक हो गया था. हाट के दुकानदार एक दूसरे को ढांढस देने के लायक नहीं रह गये थे. आग से जलते दुकानों को देख दुकानदार चीखते चिल्लाते छाती पीट कर रह गये. दुकानदार चाह कर कुछ नहीं कर पाये. कुरसेला हाट के जलते दुकानों के बीच हर तरफ चीख पुकार मची थी. आग के उठते लपटों के भयावहता से नया बाजार कुरसेला के दुकानदार समानों दुकानों को बचाने में लगा था. बाजार में हर तरफ आपाधापी की स्थिति बनी हुयी थी. थाना से आये मिनी दमकल के लिए आग बुझना संभव नहीं रह गया था. आग लगने के तकरीबन घंटा भर बाद कटिहार से पहुंचा बड़ा दमकल आग को बुझाने में असफल हो रहा था. उसके बाद भागलपुर, पूर्णिया से दमकल आने के बाद आग पर ढाई घंटा बाद नियंत्रण हो पाया. कुरसेला हाट के जले दुकानों में कपड़ा, मसाला, किराना, मोबाईल, फर्नीचर, चप्पल जुता, मनिहारा, चुड़ी, आलू प्याज सब्जी आदि दुकानें थी. हाट के कपड़ा दुकानों में आधा के करीब महिलाओं की दुकाने थी. आग से सबसे अधिक क्षति कपड़ा दुकानों का हुआ है. उसके बाद मसाला, किराना सहित अन्य दुकानों का हुआ है. आग से जले दुकानों की क्षति करोड़ों में हो सकती है. इस क्षति का भरपाई आने वाले कई वर्षो तक दुकानदारों के लिये कर पाना सभंव नहीं रह गया है. हाट में दुकान चलाने वाले दुकानदार गरीब तबके के है. हाट में दुकान चलाने वाले ने अधिकतर दुकानदारों ने कर्ज लेकर पुंजी का जुगाड़ कर रखा था. दुकानदारों का जीविका का आधार हाट की दुकानदारी थी. आग के विपदा ने उनके जीविका का आधार छीन लिया. उनके सामने नये सिरे से दुकानों को तैयार कर पुंजी का व्यवस्था करना कठिन बना हुआ है. दुकानदारी बंद होने से इनके सामने परिवार का भरण पोषण करने की मुसीबत खड़ी हो गयी है. दुकानदारों की सहायता के लिए अब तक कोई आगे नहीं आया था.
चिंगारी से उठी लपटों ने व्यवसाय से गुलजार होने वाला कुरसेला हाट को कर दिया राख
चिंगारी से उठी लपटों ने व्यवसाय से गुलजार होने वाला कुरसेला हाट को कर दिया राख
