बलिया बेलौन इबादत का महीना रमजानुल मुबारक का 23वां रोजा व चौथा जुमा अलविदा की नमाज लोगों ने अकीदत के साथ अदा की. जुमा की नमाज के दौरान तकरीर करते हुए जामे मस्जिद अबु बकर सालमारी के हाफिज इमदादुल हक कासमी ने कहा की रमजानुल मुबारक का आखरी जुमा के मौके पर अलविदा का खुतबा पढ़ा जाता है. रमजानुल मुबारक का 30वीं रोजा मुकम्मल होने पर अलगा जुमा भी अलविदा हो सकता है. कहा, रोजा के बदले अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने बंदों को दोजख की आग से हिफाजत फरमाते हैं. इसलिए सभी लोगों को एक माह का रोजा पाबंदी से रखने की गुजारिश करते हुए कहा की जिस ने भी बिना किसी वजह के रमजान का रोजा छोड़ता है तो उस पर अजाब नाजिल होता है. लोगों को एक भी रोजा नहीं छोड़नी चाहिए. रोजेदार को जन्नत नसीब होगी. रोजा रखने से इमान ताजा होता है. रोजेदार का गुनाह माफ कर दिया जाता है. रोजा इनसान को तक्वा और परहेजगार बनाता है. रोजा रखने वालों पर अल्लाह पाक की रहमत बरसती है. तकरीर में बताया की साहिबे निशाब वालों पर जकात निकाल कर गरीबों के बीच तकसीम करना वाजिब है. जकात का मशला बताते हुए कहा की जिस के पास भी साढ़े बावन तोला चांदी, या साढ़े सात तोला सोना है, या इस की कीमत के बराबर दौलत है तो उस को अपनी आमदनी से जकात निकालना जरूरी बताया. रमजानुल मुबारक का आखिरी अशरा चल रहा है. 20 या 21 मार्च को ईद मनायी जायेगी.
रमजानुल मुबारक के चौथा जुमा अलविदा अदा की
रमजानुल मुबारक के चौथा जुमा अलविदा अदा की
