कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड क्षेत्र में नदियों के जलस्तर में हो रहे लगातार उतार-चढ़ाव के बीच निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है. मौसमी नदियों का संपर्क कोसी और गंगा नदी से हो जाने तथा जलाशयों के लबालब भरने से तटीय इलाकों में विकराल स्थिति उत्पन्न हो गई है. गंगा और कोसी के उफान से दियारा क्षेत्र में बाढ़ का पानी घरों और खेतों में प्रवेश कर चुका है.
दियारा क्षेत्र के गांव बने टापू, खेती तबाह
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और उत्तराखंड में हो रही मूसलाधार बारिश का सीधा असर कुरसेला के तटीय क्षेत्रों पर दिख रहा है. कोसी और गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि से दोनों नदियों का प्रवाह एक हो गया है, जिससे तटीय इलाकों में जल प्रलय जैसा दृश्य बन गया है.
- परबल व भदई फसल जलमग्न: दियारा क्षेत्र के निचले भूभाग में लगी परबल की बहुमूल्य फसल पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब गई है. वहीं अन्य भदई फसलें भी डूबने के कगार पर हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है.
- आवागमन ठप, गांव बने टापू: गोबराही दियारा के कई गांव चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गए हैं. गंगा नदी को पार कर मुख्य बाजार या प्रखंड मुख्यालय तक आना-जाना बेहद जोखिम भरा हो गया है.
- चारे का संकट: बाघमारा धार में कोसी का पानी आने से आसपास के गांवों में पानी भर गया है. बाढ़ के कारण हरे चारे के स्रोत खत्म हो गए हैं, जिससे पशुपालकों के सामने मवेशियों को बचाने और चारा जुटाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है.
अलर्ट मोड पर प्रशासन, राहत की तैयारियां पूरी
बाढ़ के लगातार फैलते दायरे को देखते हुए प्रखंड क्षेत्र की बड़ी आबादी के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. संभावित तबाही को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गए हैं.
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ सुरक्षा, कटाव निरोधी उपायों, नावों की व्यवस्था और राहत-बचाव सामग्री वितरण को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
