कुरसेला (कटिहार). कोसी और गंगा नदी के उफान पर आने से कुरसेला प्रखंड के निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ का फैलाव तेजी से बढ़ रहा है. कई गांवों के चारों तरफ पानी फैल चुका है और लोगों के लिए आवागमन, पशुओं के चारे, खेती और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मुश्किलें बढ़ गई हैं. गंगा पार के दियारा क्षेत्र के कई गांव बाढ़ के पानी से घिरकर टापू में तब्दील होते जा रहे हैं.
सड़कों पर चढ़ा बाढ़ का पानी, आवागमन मुश्किल
बाघमारा और पंचखुटी को जोड़ने वाली सड़क पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है. इससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नदी और बाढ़ के पानी के बीच रोजमर्रा के काम के लिए आवाजाही करना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा हो गया है.
हरे चारे की किल्लत से पशुपालक परेशान
बड़े भूभाग के जलमग्न होने से पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या पैदा हो गई है. पशुपालन करने वाली महिलाएं दूर-दराज के सूखे इलाकों से हरा चारा लाकर पशुओं को खिला रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी बढ़ता रहा तो पशुपालन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है.
दियारा के गांव बने टापू, रोजमर्रा की जरूरतें जुटाना चुनौती
गंगा पार के कई गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गए हैं. दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए बाजार से दैनिक जरूरतों का सामान लाना कठिन और जोखिम भरा हो गया है. नदी पार कर बाजार तक पहुंचने के लिए लोगों को जलमार्ग पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
स्वास्थ्य सुविधा का अभाव बढ़ा रहा चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि दियारा क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र की समुचित सुविधा नहीं होने से आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है. बाढ़ के दौरान यह समस्या और गंभीर हो गई है. लोगों को आशंका है कि किसी आपात स्थिति में समय पर इलाज नहीं मिलने से परेशानी बढ़ सकती है.
फसलों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
तटीय क्षेत्रों में लगी भदई फसलों के डूबने का खतरा लगातार बढ़ रहा है. किसानों की चिंता है कि जलस्तर में और वृद्धि होने पर खेत पूरी तरह जलमग्न हो सकते हैं. दियारा क्षेत्र में परवल की खेती को पहले ही बाढ़ के पानी से नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों को आर्थिक क्षति हुई है.
कई गांवों के चारों ओर फैला बाढ़ का पानी
कुरसेला प्रखंड के पत्थलटोला, खेरिया, तीनघरिया, बालूटोला, नवटोलिया, बसुहार मजदिया, बाघमारा, पचखुटी, मेहरटोला, कुरसेला बस्ती, रामपुर ग्वालटोली, मधेली गुमटीटोला, कमलाकान्ही और मलेनियां सहित कई गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी फैल चुका है.
जलस्तर बढ़ा तो और बिगड़ सकती है स्थिति
स्थानीय लोगों के अनुसार यदि कोसी और गंगा के जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहा तो प्रखंड के अन्य निचले गांव भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत एवं आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की है.
