कोढ़ा धान कटाई का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण सड़कों पर धान सुखाने का सिलसिला तेज हो गया है. खेतों की बजाय सड़कों पर ही धान सुखाने का स्थल बना देने से सड़क हादसों की आशंका बढ़ गयी है. इससे न सिर्फ दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी हो रही है. बल्कि दुर्घटनाएं भी सामने आ रही है. कोढ़ा प्रखंड के फुलवरिया, विशनपुर, बहरखाल, मुसापुर, मखदमपुर आदि पंचायतों में किसानों के द्वारा सड़क पर धान सुखाने का कार्य जारी है. गांवों में किसान अपने कटे हुए धान को सुखाने के लिए ग्रामीण सड़कों पर फैला रहे हैं. इससे सड़क संकरी हो जाती है. जगह-जगह धान के ढेर या पतरों के कारण वाहन चालकों को रास्ता पार करना मुश्किल हो रहा है. कई जगह दोपहिया वाहन फिसलने की घटनाएं सामने आयी हैं. लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. स्थानीय लोगों की शिकायत स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हर साल यही होता है. बच्चे स्कूल जाते हैं. महिलाएं बाजार जाती हैं. सबको परेशानी होती है. कई बार बाइक सवार गिर जाते हैं. लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती. सड़क पर सुखाया गया धान बना जान का खतरा कई आवागमन कर रहे चालकों ने बताया कि सड़क पर फैले धान के कारण टायर फिसलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. जिससे सड़क दुघर्टना की संभावना बढ़ सकती है.।मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सार्वजनिक सड़कों पर ऐसी गतिविधियां दंडनीय हैं. जो यातायात को बाधित करें. ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से अपील की है कि धान सुखाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाय और सड़कों को दुर्घटनामुक्त रखने की दिशा में ठोस कदम उठाये जायें.
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