कटिहार. सदर अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. सरकार ने मरीजों व उनके परिजनों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सफाई का जिम्मा जीविका दीदियों को सौंपा है. इस कार्य को और आसान बनाने तथा अस्पताल परिसर को चमकाने के लिए कई आधुनिक मशीनें भी उपलब्ध करायी गयी है. इन मशीनों की खरीद पर लाखों रुपये खर्च भी किये गये, ताकि अस्पताल का फर्श व वार्ड अत्याधुनिक तरीके से साफ हो सके, लेकिन हैरत की बात यह है कि आज तक इन मशीनों का इस्तेमाल सफाई के लिए नहीं किया गया है. अस्पताल परिसर में प्रतिदिन वही पुरानी परंपरा देखने को मिलती है. जीविका दीदियां हाथों में झाड़ू व पोछा लेकर वार्ड से लेकर अस्पताल के हर फर्श तक की सफाई करती हैं, जबकि आधुनिक मशीनें एक रूम में कोने में धूल फांक रही हैं. और शोभा की वस्तु बनकर रह गयी हैं. अस्पताल के अंदरूनी हालात देखने पर साफ जाहिर होता है कि मशीनों का प्रयोग न होने से सफाई व्यवस्था उतनी प्रभावी नहीं हो पा रही है, जितनी होनी चाहिए.
अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है. मशीनों का उपयोग न होना केवल प्रशासनिक लापरवाही को ही उजागर नहीं करता, बल्कि यह आम जनता के पैसों की बर्बादी भी है. बता दें मशीनों से सफाई करने पर न केवल समय की बचत होगी, बल्कि बड़े क्षेत्र को तेजी से और बेहतर तरीके से साफ किया जा सकता है. इससे अस्पताल की छवि और भी निखरती और मरीजों को स्वच्छ वातावरण मिलता. अस्पताल आने वाले मरीजों के परिजनों का कहना है कि जब लाखों रुपये खर्च करके सफाई मशीनें खरीदी गयी हैं, तो उनका उपयोग भी होना चाहिए.कहते हैं अस्पताल प्रबंधक
सदर अस्पताल प्रबंधक चंदन कुमार सिंह ने बताया कि सदर अस्पताल की साफ-सफाई को लेकर मशीनों को यूज करना है, लेकिन पूरी तरह से मशीनों का यूज नहीं हो रहा है. इसको लेकर जीविका के डीपीएम को लिखित पत्राचार किया गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
