सूधानी नदी के कोटा घाट पर पुल निर्माण एक साल से ठप: कदवा-बलरामपुर के लोगों में भारी आक्रोश

सूधानी नदी पर कोटा घाट का पुल निर्माण कार्य एक साल से कछुआ गति से भी बदतर होकर पूरी तरह ठप पड़ा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के अभाव में बरसात और बाढ़ के दिनों में वे टापू बन जाते हैं. स्कूल, हाट-बाजार और रेलवे स्टेशन जाने में हो रही भारी फजीहत से आक्रोशित ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है.

पुल निर्माण कार्य अधर में लटके होने के कारण स्थानीय जनता में ठेकेदार (संवेदक) और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है. निर्माण स्थल पर कार्य शुरू करने के लिए लगाया गया सरकारी बोर्ड अब सिर्फ एक शो-पीस बनकर रह गया है. इस संबंध में क्षेत्र के पूर्व मुखिया साकीर आलम ने संवेदक पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से अविलंब काम दोबारा शुरू कराने की मांग की है.

बरसात और बाढ़ में टापू बन जाता है इलाका, जनप्रतिनिधि मौन

पूर्व मुखिया साकीर आलम और स्थानीय ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सूधानी नदी पर कोटा घाट का यह पुल दोनों विधानसभा क्षेत्रों के आपसी संपर्क और विकास के लिए एक लाइफलाइन (जीवन रेखा) है. संवेदक की मनमानी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की घोर उदासीनता के कारण एक साल पहले शुरू हुआ काम आज कछुआ गति से भी बदतर होकर पूरी तरह ठप पड़ा है. बरसात और बाढ़ के दिनों में जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तब यहां की हजारों की आबादी का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह कट जाता है और लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को विवश होते हैं.

स्कूल, हाट-बाजार और रेलवे स्टेशन जाने में हो रही भारी फजीहत

पुल निर्माण कार्य बंद होने का सीधा असर क्षेत्र के छात्रों, व्यापारियों और आम मरीजों पर पड़ रहा है:

  • छात्रों की पढ़ाई प्रभावित: नदी के उस पार जाने का कोई सुरक्षित साधन न होने से स्कूली छात्र-छात्राओं को सूधानी स्थित +2 हाई स्कूल जाने में दैनिक रूप से भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
  • व्यापार ठप: क्षेत्र के छोटे-बड़े व्यवसायियों और किसानों को अपनी फसल व सामान बेचने के लिए प्रसिद्ध कुरूम हाट जाने में लंबा चक्कर काटना पड़ता है, जिससे उनका समय और परिवहन लागत बढ़ जाती है.
  • सुरक्षा और यात्रा में देरी: ग्रामीणों ने बताया कि यदि यह पुल समय पर बनकर तैयार हो जाता, तो सूधानी ओपी (पुलिस चौकी) और सूधानी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने की दूरी बेहद कम हो जाती, जिससे आपातकालीन स्थितियों में लोगों को तुरंत मदद मिल सकती थी.

आर-पार की लड़ाई के मूड में ग्रामीण, जल्द शुरू नहीं हुआ काम तो होगा आंदोलन

कोटा घाट पर जुटे दर्जनों ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी को दो टूक चेतावनी दी है.

"पुल निर्माण के नाम पर संवेदक ने सिर्फ बोर्ड लगाकर काम को अधर में छोड़ दिया है. यह हमारी बुनियादी जरूरत और सुरक्षा से खिलवाड़ है. अगर प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय के भीतर पुल का निर्माण कार्य दोबारा युद्धस्तर पर शुरू नहीं कराया, तो दोनों विधानसभा क्षेत्रों के ग्रामीण एकजुट होकर संवेदक और प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे." — साकीर आलम, पूर्व मुखिया एवं सामाजिक कार्यकर्ता


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लेखक के बारे में

राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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