एनएफआर कटिहार मंडल में माल लोडिंग में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि, सीमेंट और कोयला परिवहन में रिकॉर्ड उछाल

सीमेंट लोडिंग में 329 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कोयला लोडिंग में 141.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसी तरह डोलोमाइट लोडिंग में 20.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली

कटिहार से नीरज की रिपोर्ट:

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने माल परिवहन के क्षेत्र में अप्रैल माह के दौरान महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. कटिहार रेल मंडल सहित एनएफआर के अन्य मंडलों में कुल 0.972 मिलियन टन माल लोडिंग दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है.

रेल प्रशासन के अनुसार, यह वृद्धि कुशल माल परिवहन संचालन और आवश्यक सामग्रियों के समय पर परिवहन की प्रतिबद्धता का परिणाम है. अप्रैल महीने में कई प्रमुख वस्तुओं की लोडिंग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई.

सीमेंट लोडिंग में 329 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कोयला लोडिंग में 141.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसी तरह डोलोमाइट लोडिंग में 20.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली. वहीं “अन्य” श्रेणी के तहत आने वाली सामग्रियों की लोडिंग में 190 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई.

रेल अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक मांग में तेजी का संकेत है. इससे न केवल आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई है, बल्कि एनएफआर के राजस्व में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है.

एनएफआर ने आने वाले समय में तकनीकी उन्नयन, परिचालन दक्षता और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही है, ताकि माल परिवहन में निरंतर वृद्धि और विश्वसनीयता बनी रहे.

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By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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