KATIHAR: डीएस कॉलेज में महिला छात्रावास बना कार्यालय भवन

यूजीसी ग्रांट की राशि से निर्मित दो मंजिला महिला छात्रावास में नियमों को ताक पर रखकर वर्षों से इग्नू, मानू और एनसीसी कार्यालय का संचालन हो रहा है. यह खुलासा आरटीआई से मांगी गई सूचना में हुआ है.

कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट:

कटिहार: पूर्वोत्तर बिहार के नामी डीएस कॉलेज में यूजीसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अधिनियम व परिनियमों की वर्षों से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. यूजीसी ग्रांट की राशि से निर्मित दो मंजिला महिला छात्रावास में नियमों को ताक पर रखकर वर्षों से इग्नू, मानू और एनसीसी कार्यालय का संचालन हो रहा है. यह खुलासा आरटीआई से मांगी गई सूचना में हुआ है.

आरटीआई से हुआ खुलासा

कोसी कॉलोनी, पूर्णिया निवासी डॉ आलोक राज द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना लोक सूचना पदाधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार व कॉलेज प्राचार्य डॉ प्रो प्रशांत कुमार की ओर से दी गई है. जवाब में बताया गया है कि डीएस कॉलेज में महिला बालिका छात्रावास यूजीसी की दसवीं योजना अंतर्गत 2006-07 में बना था. इस पर कुल 70 लाख 39 हजार 800 रुपये की लागत आई थी.

छात्रावास के लिए नहीं आया एक भी आवेदन

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि महिला छात्रावास वर्तमान में पूरी तरह संचालन योग्य है. निर्माण के बाद प्रत्येक वर्ष नामांकन के समय छात्राओं को जानकारी दी जाती रही, लेकिन अब तक एक भी छात्रा ने छात्रावास के लिए आवेदन नहीं किया. इसी वजह से रिक्त पड़े उक्त भवन में तत्काल पूर्णतः अस्थायी रूप से इग्नू, मानू तथा एनसीसी कार्यालय संचालित है.

छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल

पूर्णिया विवि बनाओ संघर्ष समिति के डॉ आलोक राज ने कहा कि कॉलेज में महिला छात्रावास रहने के बाद उक्त भवन में मानू, इग्नू और एनसीसी कार्यालय संचालित करना छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्राचार्य को इन सभी विभागों से अतिरिक्त आय मानदेय के रूप में मिलती है. वे कुलपति पूर्णिया विवि को अवगत कराएंगे और कॉलेज प्रशासन पर मामला दर्ज कराने की शिकायत करेंगे.

10 लाख के जिम का नहीं हो रहा उपयोग

डॉ आलोक राज ने बताया कि करीब 2010 में सांसद कोटे से लगभग 10 लाख रुपये का जिम का सामान कॉलेज को उपलब्ध कराया गया था. रनिंग मशीन समेत कई सामान महिला छात्रावास में ही रखे गए हैं. कॉलेज का जवाब है कि भवन में जिम भी है, लेकिन छात्र-छात्राओं द्वारा इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है.

यूजीसी के सख्त नियम

डॉ राज का कहना है कि यूजीसी जिस उद्देश्य से डीएस कॉलेज में महिला छात्रावास के लिए मोटी रकम उपलब्ध कराता है, वह उद्देश्य से भटक गया है. यूजीसी अनुदान देने से पहले कॉलेज प्राचार्य से अंडरटेकिंग लेता है कि राशि का उपयोग उसी मद में होगा. 70 लाख 39 हजार 800 रुपये से बने महिला छात्रावास में इग्नू, मानू और एनसीसी कार्यालय संचालित होना नियम के विरुद्ध है. दूसरे मद में उपयोग के लिए पहले यूजीसी को सूद समेत राशि वापस कर एनओसी लेनी पड़ती है.

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Published by: Shruti Kumari

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