कटिहार में कृषि विभाग का विशेष अभियान: बिना मिट्टी जांच के उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल पड़ेगा भारी

बिहार के कृषि विभाग ने रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया है. कटिहार के किसानों से मिट्टी जांच के बाद ही खाद डालने की अपील की गई है.

धान की बेहतर पैदावार और धरती की सेहत को महफूज रखने के लिए कृषि विभाग, बिहार द्वारा रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग को लेकर एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान शुरू किया गया है. कटिहार के जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) राजीव कुमार ने जिले के किसानों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी खेतों का पहले 'मृदा परीक्षण' (सॉइल टेस्ट) कराएं और उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही खेतों में खाद डालें. उन्होंने साफ कहा कि अंधाधुंध उर्वरक प्रयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उत्पादन क्षमता हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी.

जरूरत से ज्यादा खाद डालना सिर्फ पैसे की बार्बादी

यूरिया, डीएपी (DAP), एमओपी (MOP) एवं अन्य रासायनिक खादों का प्रयोग कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित (तय) मात्रा में ही किया जाना चाहिए. जरूरत से ज्यादा खाद डालने से लागत बढ़ती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है.

मिट्टी का बिगड़ता स्वास्थ्य

असंतुलित तरीके से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करने से मिट्टी में मौजूद बेहद जरूरी 'जैविक कार्बन' और सूक्ष्म पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती है. इसके साथ ही मिट्टी को उपजाऊ बनाने वाले प्राकृतिक व लाभकारी सूक्ष्मजीव भी मर जाते हैं.

जल और वायु प्रदूषण का बड़ा खतरा

खेतों में डाली गई अतिरिक्त खाद बारिश या सिंचाई के पानी के साथ बहकर आसपास की नदियों, तालाबों और अंततः भू-जल (ग्राउंड वाटर) में मिलकर उसे प्रदूषित कर देती है.

इसके साथ ही, यूरिया के अत्यधिक और गैर-वैज्ञानिक इस्तेमाल से अमोनिया समेत कई अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन तेजी से बढ़ता है, जो वायुमंडल की हवा को लगातार प्रदूषित कर रही हैं.

इंसानों और मवेशियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर

कृषि विभाग के अनुसार, खादों का यह असंतुलन अंततः हमारे भोजन चक्र को प्रभावित कर रहा है. भू-जल में नाइट्रेट की मात्रा अत्यधिक बढ़ने और फसलों के दानों में रसायनों के अंश (रेसिड्यू) रहने के कारण इंसानों और मवेशियों में कैंसर व पेट जनित कई गंभीर बीमारियां पनप रही हैं.

डीएओ ने दी संतुलित इस्तेमाल की सलाह

इस गंभीर संकट से बचने के लिए किसानों को अब पारंपरिक ढर्रे से हटकर स्मार्ट खेती अपनानी होगी. रासायनिक खादों के साथ-साथ जैविक खाद, कंपोस्ट, हरी खाद और जैव उर्वरकों (बायो-फर्टिलाइजर्स) का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें. हमेशा बाजार से नीम-लेपित यूरिया (Neem Coated Urea) ही खरीदें और उसे एक बार में डालने के बजाय टुकड़ों में फसल की आवश्यकता के अनुसार दें.

किसान चौपाल के जरिए गांवों में फैलेगा जागरूकता का नेटवर्क

इस अभियान को धरातल पर शत-प्रतिशत उतारने के लिए कृषि विभाग ने अपनी पूरी मशीनरी को अलर्ट कर दिया है. जिले के सभी अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों, प्रखंड कृषि पदाधिकारियों (BAO), कृषि समन्वयकों, किसान सलाहकारों समेत एटीएम (ATM) और बीटीएम (BTM) को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.

इन सभी क्षेत्रीय कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र के गांवों में लगातार भ्रमण करें, 'किसान चौपाल' लगाएं और समूह बैठकों के माध्यम से एक-एक किसान को मिट्टी जांच के फायदों से अवगत कराएं. इसका मुख्य लक्ष्य टिकाऊ और मुनाफे वाली खेती को बढ़ावा देना है.


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