फलका में अकीदत के साथ रोजेदारों ने पढ़ी, चौथी जुमा अलविदा की नमाज

फलका में अकीदत के साथ रोजेदारों ने पढ़ी, चौथी जुमा अलविदा की नमाज

– अमन व शांति के लिए आखिरी जुमा को लोगों ने मांगी दुआ फलका पाक व बरकतों का महीना रमजानुल मुबारक के चौथा जुमा अलविदा की नमाज प्रखंड की विभिन्न मस्जिदों में रोजेदारों ने अकीदत के साथ अदा की. रमजानुल मुबारक की चौथी जुमा में नमाजियों की काफी भीड़ रही. रोजेदारों ने आखिरी जुमा को नम आंखों से अलविदा दी. लोगों ने दुनिया में अमन व शांति भाईचारी के लिए दुआ मांगी. नहरी मस्जिद के इमाम मौलाना शब्बीर अहमद कासमी ने नमाज से पूर्व अपनी तकरीर में पाक माह रमजान की फजीलत पर रौशनी डालते हुए कहा कि रमजान-ऊल-मुबारक तमाम महीनों सेअफजल है. ऐसे तो इस्लाम धर्म में हर माह की अलग-अलग फजीलत है. लेकिन माह-ए-रमजान की अहमियत ज्यादा है. इस मुकद्दस माह में सवाब में सत्तर गुणा इजाफा कर दिया जाता है. उन्होंने कहा रमजान की आखरी जुमा को लोग छोटी ईद कहते है अलविदा के दिन नमाजी नहा धो कर साफ कपड़े पहन कर इतर खुशब लगा कर मस्जिद पहुंचे. ईद से पहले लोगों को फितरा निकलना चाहिए. फितरा निकाल कर गरीबों यतीमों मिश्कीनों के बीच बांट देना चाहिए. फितरा घर के हर व्यक्ति के लिए निकलना चाहिए. जो बच्चा ईद से एक दिन पहले पैदा हुआ है उनका भी फितरा निकलना वाजिब है. फितरा निकालना उस व्यक्ति पर वाजिब है जिसके पास साढ़े 52 तौला चांदी या सात भर सोना है या उनके बराबर उन्हें हैसियत है. गरीबों पर फितरा निकालना हराम है. फितरा हर एक व्यक्ति पर 45 रुपया निकालना है या 45 रुपया के बदले अनाज दाम लगा कर निकलना है. फितरा निकालने का मकसद है जो यतीम ईद में कपड़ा नहीं बनाये वह नया कपड़ा बना लें. फलका बाजार जामा मस्जिद सहित बस्ती जामा मस्जिद सालेहपुर, नहरी मस्जिद महेशपुर, पीरमोकाम, पोठिया सहित प्रखंड की अन्य मस्जिदों में माह-ए-रमजान के अलविदा की नमाज अदा की गयी. बाजार में जगह-जगह सेवई, रंग-बिरंगे कपड़े, इत्र, रुमाल, टोपी आदि की दुकानें सज गई हैं.

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By RAJKISHOR K

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