कटिहार के पूर्वोत्तर बिहार के प्रतिष्ठित डीएस कॉलेज में नए प्राचार्य डॉ. प्रो. प्रशांत कुमार के नेतृत्व में शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है. पिछले छह महीनों में कॉलेज परिसर की साफ-सफाई, भवनों की मरम्मत और विभागों के पुनर्गठन जैसे कई कार्य पूरे किए गए हैं. इससे कॉलेज एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान की ओर बढ़ता नजर आ रहा है.
40 वर्षों बाद शिक्षकों को मिले अपने विभाग
कॉलेज में करीब चार दशक से कई विषयों के शिक्षकों के लिए अलग विभाग नहीं था. अब राजनीति शास्त्र, हिंदी, अर्थशास्त्र, संस्कृत और दर्शनशास्त्र के लिए अलग विभाग बनाए गए हैं. विभागों में शिक्षकों को कुर्सी, टेबल और आलमारी जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं. हालांकि दर्शनशास्त्र विभाग में अभी शिक्षक का पद रिक्त है.
वर्षों से बंद बॉटनी विभाग फिर हुआ शुरू
लंबे समय से बंद पड़े बॉटनी विभाग का ताला खोलकर उसकी मरम्मत कराई गई है. विभाग में शौचालय, खिड़की और दरवाजों की मरम्मत के बाद इसे दोबारा चालू कर दिया गया है. कई शिक्षकों को पहले इस अलग कक्ष की जानकारी भी नहीं थी.
कम खर्च में बड़ा बदलाव
कॉलेज प्रशासन के अनुसार पांच-छह विभागों को व्यवस्थित करने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महज 10 से 12 हजार रुपये का खर्च आया है. अब सभी विभागों के बाहर नेमप्लेट लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि छात्र-छात्राओं को संबंधित विभाग और शिक्षकों तक पहुंचने में सुविधा हो.
शैक्षणिक गुणवत्ता पर रहेगा अगला फोकस
प्राचार्य डॉ. प्रो. प्रशांत कुमार ने कहा कि अब कॉलेज में शैक्षणिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. कॉलेज में हो रहे बदलाव से छात्र, शिक्षक और पूर्ववर्ती छात्र भी संतोष जता रहे हैं.
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