डीएस कॉलेज का जर्जर पुस्तकालय भवन दे रहा बड़े हादसे को आमंत्रण, दीमक चाट गईं 8 हजार बेशकीमती किताबें

DS College: पूर्वोत्तर बिहार के प्रतिष्ठित दर्शन साह (डीएस) कॉलेज का पुस्तकालय भवन देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुका है. आलम यह है कि 26 साल पुराने इस भवन की छत से पानी टपक रहा है और ज्ञान के इस मंदिर में रखीं 40 हजार किताबों में से करीब 8 हजार किताबों को दीमक ने नष्ट कर दिया है.

कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट

DS College: कटिहार जिले के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर बिहार में उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले दर्शन साह (डीएस) कॉलेज की शैक्षणिक रीढ़ यानी इसका पुस्तकालय (लाइब्रेरी) आज खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. वर्ष 1999 में निर्मित हुआ यह पुस्तकालय भवन वर्तमान में इस कदर जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुका है कि यह कभी भी जमींदोज हो सकता है. कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन की उदासीनता के कारण भवन की छत पर बड़े-बड़े जंगली झाड़ उग आए हैं. दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, खिड़कियां टूट गई हैं और भवन के मुख्य पिलर (खंभे) दरकने लगे हैं, जिससे यहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

खौफ के साये में ड्यूटी करने को मजबूर हैं कर्मचारी

पुस्तकालय की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के मुख्य बिंदुओं को निम्नलिखित रूप में समझा जा सकता है:

  • जान जोखिम में: इस डरावने और असुरक्षित माहौल के बावजूद लाइब्रेरी के कर्मचारी और अधिकारी खौफ के साये में प्रतिदिन अपनी ड्यूटी करने को विवश हैं. वे इसी क्षतिग्रस्त छत के नीचे बैठकर छात्र-छात्राओं के बीच पुस्तकों का लेनदेन करते हैं.
  • बदले कई प्राचार्य, नहीं बदली दशा: पिछले दो दशकों में कॉलेज में कई प्राचार्यों (प्रिंसिपलों) का तबादला हुआ और नए आए, लेकिन किसी ने भी इस ऐतिहासिक पुस्तकालय भवन के जीर्णोद्धार या मरम्मत की सुध नहीं ली.

40 हजार में से 8 हजार किताबें हुईं नष्ट, नए सिलेबस का अकाल

ज्ञान के भंडार पर दीमकों का हमला: किसी भी शैक्षणिक संस्थान का पुस्तकालय उसका ‘हृदय’ माना जाता है, लेकिन डीएस कॉलेज का यह हृदय धीरे-धीरे धड़कना बंद कर रहा है. लाइब्रेरी में कुल 40 हजार ज्ञानवर्धक और ऐतिहासिक किताबें मौजूद हैं, लेकिन सीलन और दीमक के प्रकोप के कारण इनमें से लगभग 8 हजार महत्वपूर्ण किताबें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं.

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वर्ष 2018 में विश्वविद्यालय स्तर से यहाँ महज 200 नई किताबें भेजी गई थीं. इसके बाद साल 2020 में ‘नई शिक्षा नीति’ (NEP) लागू होने और वर्ष 2023 से ‘सेमेस्टर सिस्टम’ के तहत पढ़ाई शुरू होने के बावजूद, नए सिलेबस (पाठ्यक्रम) की किताबें आज तक इस लाइब्रेरी को नसीब नहीं हो सकी हैं. नए कोर्स की पुस्तकें न होने के कारण छात्रों ने अब यहाँ से किताबें लेना लगभग बंद कर दिया है.

26 साल का इतिहास: उद्घाटन के बाद से एक बार भी नहीं हुआ मेंटेनेंस

शोपीस बनी व्यवस्था:

कर्मचारियों के अनुसार, वर्ष 1999 में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU) के तत्कालीन कुलपति डॉ. आरके चौधरी, मुख्य अतिथि सह बिहार विधानसभा के तत्कालीन उपाध्यक्ष जगबंधु अधिकारी और तत्कालीन प्राचार्य प्रो. गौतम सिंह ने बड़े अरमानों के साथ इस पुस्तकालय का उद्घाटन किया था. उद्घाटन के बाद से आज तक (26 वर्षों में) इस भवन की एक बार भी रंग-रोगन या मरम्मत नहीं कराई गई.

पुस्तकालय के बाहर लगा ‘बुक लेटर बॉक्स’ वर्षों से बंद पड़ा है, जिसका ताला तक नहीं खोला गया है. पूर्व में यहाँ छात्रों के लिए बकायदा रूटीन तय था (कला के लिए 2 दिन, वाणिज्य के लिए 2 दिन और विज्ञान के लिए 2 दिन किताबें बांटने का नियम). मगर अब आउटडेटेड किताबों के कारण मांग घटने से यूजी और पीजी के जो भी गिने-चुने छात्र आते हैं, उन्हें हाथों-हाथ कोई भी उपलब्ध किताब थमा दी जाती है.

पुस्तकाध्यक्ष बोले: नए सत्र के लिए किताबें मंगाने की प्रक्रिया शुरू

प्रशासनिक आश्वासन:

इस पूरे मामले पर पुस्तकालय के अध्यक्ष (पुस्तकाध्यक्ष) शंभू कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने भवन की इस बदतर और खतरनाक स्थिति को लेकर पूर्व के कई प्राचार्यों को लिखित रूप से आवेदन दिया था, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. उन्होंने कहा:

“वर्तमान प्राचार्य को भी इस गंभीर समस्या और जर्जर भवन से लिखित रूप में अवगत कराया गया है. उन्होंने भरोसा दिलाया है कि कॉलेज के आंतरिक फंड से जहाँ तक संभव हो सकेगा, भवन की तात्कालिक मरम्मत करवाई जाएगी. इसके साथ ही नए सिलेबस के अनुसार पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए सभी शैक्षणिक विभागों को नोटिस भेज दिया गया है, और नई किताबें मंगाने की टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.”

बहरहाल, शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले इस नामी कॉलेज में ज्ञान के इस विशाल भंडार की ऐसी दुर्दशा देखकर स्थानीय बुद्धिजीवियों और छात्र संगठनों में गहरा आक्रोश है. लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किए बिना इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए अविलंब कदम उठाए.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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