इलाज के दौरान बिगड़ी हालत, रेफर के दौरान रास्ते में मौत

इलाज के दौरान बिगड़ी हालत, रेफर के दौरान रास्ते में मौत

1 गलत इंजेक्शन या घोर लापरवाही महिला की मौत के बाद क्लिनिक में ‘सौदेबाजी’ का आरोप मुआवजे के नाम पर लाखों की सौदेबाजी की चर्चा से बढ़ा आक्रोश बारसोई बारसोई प्रखंड के बांसगांव पंचायत अंतर्गत बड़टोला में स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. यहां स्थित एक निजी क्लिनिक में इलाज के दौरान कथित रूप से गलत इंजेक्शन देने से एक महिला की मौत हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. घटना के बाद परिजनों के आक्रोश और मुआवजे को लेकर कथित सौदेबाजी की चर्चा ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. मृतका की पहचान चापाखोर पंचायत के चांदपारा गांव निवासी अजीदा खातून के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार, अचानक तबीयत बिगड़ने पर महिला को इलाज के लिए बड़टोला स्थित अबरार क्लिनिक लाया गया था. यहां चिकित्सक द्वारा जांच के बाद इंजेक्शन और दवा दी गई तथा जल्द स्वस्थ होने का भरोसा दिलाया गया. परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही देर बाद महिला की हालत तेजी से बिगड़ने लगी. स्थिति गंभीर होते देख क्लिनिक से उसे बाहर रेफर कर दिया गया. लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. मौत की सूचना मिलते ही परिजन शव को लेकर क्लिनिक पहुंच गए और न्याय की मांग को लेकर हंगामा करने लगे. देखते ही देखते क्लिनिक परिसर के बाहर भारी भीड़ जुट गई. जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया. सूचना मिलते ही आबादपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई. मुआवजे के नाम पर सौदेबाजी की चर्चा घटना के बाद मामला और भी तूल पकड़ लिया. जब स्थानीय स्तर पर ‘समाज के ठेकेदारों’ द्वारा मुआवजे के नाम पर सौदेबाजी की चर्चा सामने आई. सूत्रों के अनुसार, करीब 5 लाख 20 हजार रुपये में मामले को रफा-दफा करने की बातचीत हुई. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. लेकिन इस चर्चा ने स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अवैध क्लिनिकों पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई अवैध नर्सिंग होम और फर्जी क्लिनिक बिना किसी भय के संचालित हो रहे हैं. प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में इनका मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है. जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है. पुलिस ने क्या कहा इस संबंध में पुलिस का कहना है कि परिजनों की ओर से अब तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है. आवेदन मिलने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. अब सवाल यह है कि क्या ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के नाम पर इस तरह की लापरवाही और मौत के बाद मोलभाव की प्रवृत्ति आम हो चुकी है. आखिर कब तक अवैध क्लिनिक लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करते रहेंगे और जिम्मेदार तंत्र मौन बना रहेगा.

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By MANISH KUMAR

MANISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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