कटिहार, बारसोई. नगर पंचायत बारसोई में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अधूरे आवासों को लेकर नगर पंचायत प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. योजना के तहत स्वीकृत 620 लाभुकों में 540 ने अब तक अपने आवास का निर्माण पूरा कर लिया है, जबकि 80 लाभुकों के आवास अब भी अधूरे हैं. नगर पंचायत प्रशासन ने इन लाभुकों को 30 सितंबर 2026 तक हर हाल में निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है.
80 लाभुकों के आवास अब भी अधूरे
नगर पंचायत के अनुसार योजना के तहत कुल 620 आवास स्वीकृत किए गए थे. इनमें से 540 लाभुकों ने आवास निर्माण का काम पूरा कर लिया है. वहीं 80 लाभुकों द्वारा अब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया है. लंबित आवासों को लेकर प्रशासन की ओर से अब समय सीमा निर्धारित कर दी गयी है.
किस्त की राशि लेकर निर्माण अधूरा छोड़ने पर होगी कार्रवाई
नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी रजनीश कुमार ने बताया कि कई लाभुक प्रथम और द्वितीय किस्त की अनुदान राशि प्राप्त करने के बावजूद आवास निर्माण पूरा नहीं कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे लाभुकों को निर्माण कार्य के प्रति गंभीरता दिखानी होगी.
उन्होंने कहा कि यदि लाभुक निर्धारित समय में निर्माण पूरा नहीं करते हैं तो उनसे पूर्व में दी गयी अनुदान राशि की वसूली के लिए विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी.
30 सितंबर के बाद नहीं होगा भुगतान
कार्यपालक पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभागीय निर्देश के अनुसार सभी लंबित आवासों का निर्माण 30 सितंबर 2026 तक पूरा करना अनिवार्य है. इसके बाद योजना के लंबित लाभुकों को किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा तक निर्माण कार्य पूरा नहीं करने वाले लाभुकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. साथ ही पूर्व में दी गयी अनुदान राशि की वसूली की प्रक्रिया भी अपनायी जाएगी.
निर्माण पूरा होने के बाद जियो-टैग कराना जरूरी
नगर पंचायत प्रशासन ने लंबित लाभुकों से अपील की है कि वे समय सीमा का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द आवास निर्माण पूरा करें. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद आवास का भू-स्थानिक अंकन यानी जियो-टैग भी अनिवार्य रूप से कराने को कहा गया है.
लाभुकों से समय पर काम पूरा करने की अपील
नगर पंचायत प्रशासन ने लाभुकों से योजना की गंभीरता को समझते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर आवास निर्माण पूरा करने का आग्रह किया है. प्रशासन का कहना है कि समय पर निर्माण पूरा नहीं करने की स्थिति में लाभुकों को आर्थिक के साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है.
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