बाल विवाह की रोकथाम को लेकर सामुदायिक जागरूकता जरूरी : प्रधान न्यायाधीश

जिला व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित न्याय सदन में प्रधान न्यायाधीश धृति जैसलीन शर्मा की अध्यक्षता में आशा कार्यक्रम की बैठक आयोजित की गयी.

आशा कार्यक्रम से बाल विवाह की रोकथाम पर जोर

कटिहार. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश के आलोक में जिला व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित न्याय सदन में प्रधान न्यायाधीश धृति जैसलीन शर्मा की अध्यक्षता में आशा कार्यक्रम की बैठक आयोजित की गयी. बैठक को संबंधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश धृति जैसलीन शर्मा ने बताया कि आशा योजना के तहत बाल विवाह के कारण दुष्प्रभाव एवं बाल विवाह प्रतिशेध अधिनियम 2006 के प्रति समुदाय को जागरूक करने एवं इस सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने के लिए आशा यूनिट की यह बैठक आयोजित की गयी है. बैठक का उद्देश्य सभी हितधारकों की सहयोग से आशा यूनिट को सशक्त कर जिला स्तर पर एक्शन प्लान बनाकर बाल विवाह को समाप्त करना है. जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक रविशंकर तिवारी ने बताया कि बाल संरक्षण इकाई जिले में बच्चों के नोडल इकाई के रूप में काम कर रही है. जिसके देखरेख में जिले में चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यरत है. अगर किसी भी तरह बाल विवाह की जानकारी होने पर चाइल्डलाइन के टोल फ्री नंबर 1098 पर दें, ताकि इस पर उचित कार्रवाई हो सके. प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर बाल कल्याण संरक्षण समिति गठित है. समिति के माध्यम से बाल विवाह एवं बच्चों से संबंधित समस्या का समाधान किया जाता है.

बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए अनिवार्यता

उन्होंने कहा कि बच्चों से संबंधित किसी भी तरह की समस्या होने पर जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति एवं चाइल्ड हेल्पलाइन को जानकारी दें. अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार कमलेश सिंह देऊ ने आशा कार्यक्रम के कार्य एवं उद्देश्य के विषय में विस्तृत रूप से जानकारी दी. मौके पर तटवासी समाज न्यास के परियोजना प्रबंधक फारूक आलम ने बताया कि बच्चे हमारे भविष्य की नींव है. भारत में दुनिया के लगभग 19 प्रतिशत बच्चे रहते हैं. उनके अधिकारों की रक्षा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक बेहतर भविष्य के लिए अनिवार्यता बन जाती है. हाल ही में सोसाइटी ऑफ एनलाइटनमेंट एंड वॉलंटरी एक्शन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह को रोकने के लिए पीड़ितों के पुनर्वास और उन्हें समाज में पुन: स्थापित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इस निर्णय के अनुपालन में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की है. यह मानव संचालन प्रक्रिया बाल विवाह की समस्या से निबटने के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार करने का लक्ष्य रखता है.

बैठक में अपर समाहर्ता अभिषेक रंजन, सदर अनुमंडल पदाधिकारी आलोक चंद्र, डीएसपी हेडक्वार्टर सह नोडल एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट मृदुलता, जिला शिक्षा पदाधिकारी राहुल चंद्र चौधरी, स्वास्थ्य विभाग से डॉ सुशांत कुमार, महिला विकास निगम से शमीम अंसारी, प्रभा कुमारी व किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य राजेश कुमार सिंह ने बाल संरक्षण संबंधित जानकारी दी एवं बालहित में इस तरह की बाल विवाह जैसे कुरीतियों को समाप्त करने के लिए समाज को जागरूक करने की जरूरत पर बल दिया. कार्यक्रम में तटवासी समाज न्यास के प्रतिनिधि एवं विभिन्न हित धारक उपस्थित होकर अपने अपने स्तर से बाल संरक्षण के क्षेत्र में भरपूर सहयोग देने की बात कही.

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By RAJKISHOR K

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