शिलान्यास के दो साल बाद भी अधर में लटकी अमदाबाद-बंगाल सीमा सड़क: डेडलाइन बीते डेढ़ वर्ष हुए पूरे, महानंदा घाट जाने वाले राहगीर व सब्जी व्यवसायी बेहाल

कटिहार जिले के सुदूरवर्ती अमदाबाद प्रखंड में प्रशासनिक उदासीनता और संवेदक की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत गोविंदपुर से गोविंदपुर बहरसाल पश्चिम बंगाल सीमा तक बनने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण सड़क शिलान्यास के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी मुकम्मल नहीं हो सकी है. कार्य समाप्ति की निर्धारित तिथि (डेडलाइन) से डेढ़ साल से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है, जिससे बिहार-बंगाल के बीच रोजाना सफर करने वाली एक बड़ी आबादी जर्जर रास्ते पर हिचकोले खाने को मजबूर है.

महानंदा नदी पार कर बंगाल जाने का मुख्य मार्ग, ‘बेटी-रोटी’ का जुड़ाव प्रभावित

अमदाबाद प्रखंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसकी सीमा पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से सीधे जुड़ती है. दोनों राज्यों के सीमावर्ती गांवों के बीच न केवल पारिवारिक और ‘बेटी-रोटी’ का गहरा नाता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी अमदाबाद के लोगों का व्यवसाय बंगाल के बाजारों पर ही टिका हुआ है.

बाजार और व्यापार पर पड़ा असर:

  • गोबरा हाट का महत्व: प्रत्येक सोमवार को पश्चिम बंगाल के गोबरा में लगने वाली साप्ताहिक मंडी यहाँ के छोटे दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं के लिए जीवन रेखा मानी जाती है.
  • सब्जी व्यवसायियों की आफत: अमदाबाद के दर्जनों सब्जी व्यवसाई रोजाना तड़के सुबह इसी जर्जर सड़क के सहारे गोविंदपुर घाट पहुंचते हैं, जहां से नाव के जरिए महानंदा नदी पार कर बंगाल से हरी सब्जियां लाते हैं. सड़क की बदहाली से उनका व्यापार पूरी तरह मंदा पड़ गया है.

सरकारी सूचना पट्ट (साइनबोर्ड) के अनुसार परियोजना का पूरा लेखा-जोखा

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्यस्थल पर लगाए गए आधिकारिक सूचना पट्ट के अनुसार इस महत्वपूर्ण सड़क निर्माण योजना के वित्तीय और तकनीकी आंकड़े नीचे दी गई सारणी (Table) में सुव्यवस्थित रूप से अंकित हैं:

योजना एवं प्राक्कलन का विवरणआधिकारिक प्रशासनिक आंकड़े (विभागीय डेटा)
संबंधित योजना का नामप्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
सड़क का रूट / मार्गगोविंदपुर चौक से गोविंदपुर बहरसाल (पश्चिम बंगाल सीमा तक)
सड़क की कुल लंबाई6.150 किलोमीटर (6 किमी 150 मीटर)
कुल प्राक्कलित निर्माण राशि6 करोड़ 38 लाख 7.280 रुपये
5 वर्षीय रखरखाव (अनुरक्षण) फंड58 लाख 43 हजार 650 रुपये
कार्य प्रारंभ करने की आधिकारिक तिथि22 दिसंबर 2023
कार्य पूर्ण करने की निर्धारित अंतिम तिथि21 दिसंबर 2024
शिलान्यासकर्ता व तिथितत्कालीन सांसद दुलाल चंद्र गोस्वामी (28 फरवरी 2024)
वर्तमान भौतिक स्थितिकार्य पूरी तरह बंद, आधी-अधूरी सड़क अधर में लटकी.

बरसात में बन जाता है कीचड़ का टापू; आजादी के बाद पहली बार काम शुरू होकर हुआ बंद

स्थानीय ग्रामीण शेख इकरामुल, अर्जुन कुमार, कैलाश, फूल कुमार और सुग्रीव सिंह आदि ने अत्यंत रोष व्यक्त करते हुए बताया कि महानंदा बांध से लेकर गोविंदपुर घाट तक की यह सड़क दशकों से बदहाल थी. आजादी के बाद पहली बार जब पिछले साल इस सड़क पर अलकतरा (पिचिंग) और सोलिंग का काम शुरू हुआ, तो पूरे इलाके के ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई थी कि अब उन्हें कीचड़ से मुक्ति मिलेगी.

लेकिन संवेदक ने महज कुछ दिनों तक थोड़ा-बहुत काम कराकर रोलर और गाड़ियां हटा लीं. अब स्थिति यह है कि सामान्य दिनों में धूल के गुबार उड़ते हैं और आगामी बरसात के दिनों में पूरी सड़क पर गहरा जलजमाव व कीचड़ फैल जाएगा, जिससे नाव पकड़ने के लिए घाट तक पैदल जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह सड़क बन जाती, तो सीमांचल के व्यापार को एक नई गति मिलती.

विभाग मौन, कनीय अभियंता ने काट दिया फोन

विभागीय घोर लापरवाही और कछुआ गति से चल रहे कार्य को लेकर जब ग्रामीण विकास विभाग के कनीय अभियंता (JE) मनीष कुमार चंद्रा के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन पर बात करना उचित नहीं समझा और संपर्क नहीं हो पाया.

विभाग की इस चुप्पी से आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून की पहली बारिश से पूर्व इस सड़क का निर्माण कार्य दोबारा युद्धस्तर पर शुरू नहीं किया गया, तो वे अनुमंडल मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

अमदाबाद (कटिहार) से मनोज कुमार की रिपोर्ट

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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