महानंदा नदी पार कर बंगाल जाने का मुख्य मार्ग, ‘बेटी-रोटी’ का जुड़ाव प्रभावित
अमदाबाद प्रखंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसकी सीमा पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से सीधे जुड़ती है. दोनों राज्यों के सीमावर्ती गांवों के बीच न केवल पारिवारिक और ‘बेटी-रोटी’ का गहरा नाता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी अमदाबाद के लोगों का व्यवसाय बंगाल के बाजारों पर ही टिका हुआ है.
बाजार और व्यापार पर पड़ा असर:
- गोबरा हाट का महत्व: प्रत्येक सोमवार को पश्चिम बंगाल के गोबरा में लगने वाली साप्ताहिक मंडी यहाँ के छोटे दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं के लिए जीवन रेखा मानी जाती है.
- सब्जी व्यवसायियों की आफत: अमदाबाद के दर्जनों सब्जी व्यवसाई रोजाना तड़के सुबह इसी जर्जर सड़क के सहारे गोविंदपुर घाट पहुंचते हैं, जहां से नाव के जरिए महानंदा नदी पार कर बंगाल से हरी सब्जियां लाते हैं. सड़क की बदहाली से उनका व्यापार पूरी तरह मंदा पड़ गया है.
सरकारी सूचना पट्ट (साइनबोर्ड) के अनुसार परियोजना का पूरा लेखा-जोखा
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्यस्थल पर लगाए गए आधिकारिक सूचना पट्ट के अनुसार इस महत्वपूर्ण सड़क निर्माण योजना के वित्तीय और तकनीकी आंकड़े नीचे दी गई सारणी (Table) में सुव्यवस्थित रूप से अंकित हैं:
| योजना एवं प्राक्कलन का विवरण | आधिकारिक प्रशासनिक आंकड़े (विभागीय डेटा) |
| संबंधित योजना का नाम | प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) |
| सड़क का रूट / मार्ग | गोविंदपुर चौक से गोविंदपुर बहरसाल (पश्चिम बंगाल सीमा तक) |
| सड़क की कुल लंबाई | 6.150 किलोमीटर (6 किमी 150 मीटर) |
| कुल प्राक्कलित निर्माण राशि | 6 करोड़ 38 लाख 7.280 रुपये |
| 5 वर्षीय रखरखाव (अनुरक्षण) फंड | 58 लाख 43 हजार 650 रुपये |
| कार्य प्रारंभ करने की आधिकारिक तिथि | 22 दिसंबर 2023 |
| कार्य पूर्ण करने की निर्धारित अंतिम तिथि | 21 दिसंबर 2024 |
| शिलान्यासकर्ता व तिथि | तत्कालीन सांसद दुलाल चंद्र गोस्वामी (28 फरवरी 2024) |
| वर्तमान भौतिक स्थिति | कार्य पूरी तरह बंद, आधी-अधूरी सड़क अधर में लटकी. |
बरसात में बन जाता है कीचड़ का टापू; आजादी के बाद पहली बार काम शुरू होकर हुआ बंद
स्थानीय ग्रामीण शेख इकरामुल, अर्जुन कुमार, कैलाश, फूल कुमार और सुग्रीव सिंह आदि ने अत्यंत रोष व्यक्त करते हुए बताया कि महानंदा बांध से लेकर गोविंदपुर घाट तक की यह सड़क दशकों से बदहाल थी. आजादी के बाद पहली बार जब पिछले साल इस सड़क पर अलकतरा (पिचिंग) और सोलिंग का काम शुरू हुआ, तो पूरे इलाके के ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई थी कि अब उन्हें कीचड़ से मुक्ति मिलेगी.
लेकिन संवेदक ने महज कुछ दिनों तक थोड़ा-बहुत काम कराकर रोलर और गाड़ियां हटा लीं. अब स्थिति यह है कि सामान्य दिनों में धूल के गुबार उड़ते हैं और आगामी बरसात के दिनों में पूरी सड़क पर गहरा जलजमाव व कीचड़ फैल जाएगा, जिससे नाव पकड़ने के लिए घाट तक पैदल जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह सड़क बन जाती, तो सीमांचल के व्यापार को एक नई गति मिलती.
विभाग मौन, कनीय अभियंता ने काट दिया फोन
विभागीय घोर लापरवाही और कछुआ गति से चल रहे कार्य को लेकर जब ग्रामीण विकास विभाग के कनीय अभियंता (JE) मनीष कुमार चंद्रा के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन पर बात करना उचित नहीं समझा और संपर्क नहीं हो पाया.
विभाग की इस चुप्पी से आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून की पहली बारिश से पूर्व इस सड़क का निर्माण कार्य दोबारा युद्धस्तर पर शुरू नहीं किया गया, तो वे अनुमंडल मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
अमदाबाद (कटिहार) से मनोज कुमार की रिपोर्ट
