अमदाबाद : अमदाबाद प्रखंड में बाढ़ की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पिछले दो दिनों में गंगा नदी के जलस्तर में भले ही एक से दो इंच की मामूली कमी आयी हो, लेकिन निचले इलाकों में अब भी बाढ़ का पानी पसरा हुआ है. कई पंचायतों की प्रमुख सड़कें पूरी तरह जलमग्न हैं. जिन सड़कों पर कभी वाहन दौड़ते थे, वहां अब नावों का आवागमन हो रहा है.
दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क पखवाड़े से ठप
पार दियारा, दुर्गापुर, भवानीपुर खट्टी, चौकिया पहाड़पुर समेत कई पंचायतों की प्रमुख सड़कें बाढ़ के पानी में डूबी हुई हैं. दक्षिणी करीमुल्लापुर पंचायत के मेघु टोला जाने वाली मुख्य सड़क पर भी पानी का तेज बहाव हो रहा है.
घेरा गांव, झब्बू टोला, नफरु टोला, युसूफ टोला, सूबेदार टोला और कीर्ति टोला समेत दर्जनों गांवों का प्रखंड मुख्यालय से सड़क संपर्क करीब 15 दिनों से प्रभावित है. ग्रामीणों को आने-जाने के लिए निजी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है.
एक गांव से दूसरे गांव तक नाव ही सहारा
स्थानीय लोगों के अनुसार घेरा गांव से छोटा रघुनाथपुर तक नाव से जाना पड़ता है. इसके बाद ग्रामीण जिला मुख्यालय और अन्य जगहों के लिए आगे का सफर तय करते हैं.
मेघु टोला की स्थिति भी बेहद खराब बतायी जा रही है. गांव की सड़कें जर्जर हैं और उन पर तेज पानी बह रहा है. कई जगह ग्रामीणों को दो से तीन बार नाव बदलकर आवागमन करना पड़ रहा है.
मुख्य सड़क पर दो से तीन फीट पानी
प्रखंड मुख्यालय से भरत टोला होते हुए मुरली राम टोला, बबल बन्ना और अन्य गांवों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर कई जगह दो से तीन फीट पानी बह रहा है. रोजमर्रा के जरूरी काम के लिए भी लोगों को जोखिम उठाकर बाहर निकलना पड़ रहा है.
ग्रामीण राकेश कुमार, कैलाश कुमार, राजू शर्मा और उस्मान समेत अन्य ने बताया कि प्रशासन की ओर से पर्याप्त सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण निजी नाव चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से सरकारी नाव उपलब्ध कराने की मांग की है.
चार-पांच वार्डों में घुसा बाढ़ का पानी
दुर्गापुर पंचायत के मुखिया गोपाल प्रसाद सिंह ने बताया कि पंचायत के करीब चार से पांच वार्डों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. उन्होंने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित परिवारों का सर्वे कराने और जल्द राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है.
बाढ़ का पानी थोड़ा कम होने के बावजूद ग्रामीणों की परेशानी कम नहीं हुई है. सड़क संपर्क बहाल होने और सरकारी नाव की पर्याप्त व्यवस्था होने तक लोगों को आवागमन के लिए इसी तरह मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
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