अमदाबाद : अमदाबाद प्रखंड में बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. लगातार जलस्तर बढ़ने से लोगों की मुश्किलें दिनों-दिन गंभीर होती जा रही हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने सोमवार को जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने आला अधिकारियों के साथ दौरा किया और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए. डीएम ने सामुदायिक रसोई चलाने और विस्थापित परिवारों के बीच पॉलिथीन शीट बांटने का निर्देश दिया है.
इसके बावजूद कई बाढ़ प्रभावित परिवार अब भी राहत के इंतजार में हैं. कई घरों में कई दिनों से चूल्हा नहीं जला है और लोग किसी तरह बाल-बच्चों का भरण-पोषण कर रहे हैं.
लगातार गंदे पानी में रहने से पैरों में फंगस की शिकायत
अमदाबाद के दुर्गापुर पंचायत स्थित लक्खी टोला गांव में बाढ़ की स्थिति सबसे गंभीर बतायी जा रही है. ग्रामीणों के अनुसार कई दिनों से गंदे पानी में रहने के कारण लोगों के पैरों में फंगस और चर्म रोग जैसी समस्याओं की शिकायत सामने आने लगी है.
लोग अब बाढ़ के पानी में उतरने से बचना चाहते हैं, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों और आवागमन के लिए उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. कई जगहों पर ग्रामीणों को कमर भर पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है.
इन पंचायतों में पूरी तरह जलमग्न हुए कई इलाके
अमदाबाद की चौकिया पहाड़पुर, दुर्गापुर, भवानीपुर खट्टी, पार दियारा और दक्षिणी करीमुल्लापुर पंचायत के कई हिस्से पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं. वहीं बैदा, जंगला टाल, लखनपुर, पूर्वी करीमुल्लापुर और किशनपुर समेत अधिकांश पंचायतों में भी बाढ़ का पानी फैल गया है.
कई गांव चारों तरफ से पानी से घिर गये हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है.
बाढ़ की स्थिति के मुख्य बिंदु
- लक्खी टोला में लगातार गंदे पानी में रहने से पैरों में फंगस और चर्म रोग की शिकायत.
- कई परिवारों के घरों में कई दिनों से नहीं जला चूल्हा.
- कई गांवों में कमर भर पानी से होकर आने-जाने की मजबूरी.
- चौकिया पहाड़पुर, दुर्गापुर समेत कई पंचायतों में जलभराव की गंभीर स्थिति.
- दर्जनों गांवों में घरों के आसपास बाढ़ का पानी घुसा.
- कुछ स्थानों पर सामुदायिक रसोई और सरकारी नाव का संचालन शुरू.
दर्जनों गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
दक्षिणी करीमुल्लापुर के चौक चामा, घिसु टोला, मेघु टोला, जलेबी टोला और त्रिलोकी डारा में पानी घुसने से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. वहीं उत्तरी करीमुल्लापुर के छर्रामारी, बैद्यनाथपुर, गारद टोला और प्यून टोला समेत दर्जनों गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं.
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित आवागमन, भोजन और दैनिक जरूरतों की बनी हुई है. पानी से घिरे इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है.
सामुदायिक रसोई और नाव शुरू, फिर भी राहत कम
प्रशासन की ओर से कुछ प्रभावित इलाकों में सामुदायिक रसोई शुरू की गयी है. सरकारी नावों का भी परिचालन कराया जा रहा है. अधिकारियों की टीम लगातार प्रभावित इलाकों का जायजा ले रही है.
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ने के कारण उपलब्ध राहत जरूरत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है. ऐसे में प्रभावित परिवारों को भोजन, सुरक्षित आवागमन और स्वास्थ्य सुविधाओं की तत्काल जरूरत है.
बाढ़ के पानी में लंबे समय तक रहने से त्वचा संबंधी समस्याओं की शिकायतों के बीच प्रभावित लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच और जरूरी चिकित्सा सहायता भी महत्वपूर्ण हो गयी है. प्रशासन के सामने अब राहत पहुंचाने के साथ-साथ जलजनित और त्वचा संबंधी परेशानियों से बचाव की चुनौती भी है.