30 प्रतिशत से अधिक नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ता के नाम संघ से हटाये जा सकते हैं प्रतिनिधि, कटिहारसर्टिफिकेट ऑफ प्लेस ऑफ प्रैक्टिस एंड (वेरीफिकेशन) रूल्स 2015 के तहत अधिवक्ता संघ कटिहार में आवेदन पत्र लेने की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो गयी. लगभग 1200 अधिवक्ताओं से अधिक नामांकन रहने के बावजूद अंतिम जानकारी मिलने तक सोमवार को 757 आवेदन पत्र ही प्राप्त किया सका. अंतिम दिन कई नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ताओं ने भी कड़ाई के बावजूद फार्म लेने में सफल रहे. लेकिन गठित समिति के सदस्यों ने भी उन्हें अपने मन ही मन चिन्हित करते रहे. नहीं मिलेगा मौका अनियमित अधिवक्ताओं कोअधिवक्ता संघ के सचिव विजय कुमार झा ने कहा कि आवेदन पत्र भर कर नियमानुसार आगामी 30 जून तक स्वीकार किये जा सकेंगे. उन्होंने कहा कि मंगलवार से गठित समिति द्वारा भरे हुए आवेदन पत्र स्वीकार किये जा सकेंगे. तत्पश्चात आवेदन पत्रों की स्क्रूटनी की जायेगी. श्री झा ने जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी सूरत में नॉन प्रैक्टिसींग एवं फर्जी अधिवक्ताओं के नाम बिहार स्टेट बार काउंसिल को नहीं भेजी जायेगी. उन्होंने यह भी कहा कि जो अनियमित अधिवक्ता जुगार टेक्नोलॉजी लगा कर आवेदन प्राप्त कर लिये हैं. उनके आवेदन पत्रों को निश्चित रूप से अस्वीकार कर दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि कई अधिवक्ताओं के नाम अपने लोगों को फार्म दिलवाने से लेकर वकालतनामा में नाम चढ़वाने की सूचना संघ को प्राप्त हुई थी. लेकिन संघ इस बात पर अडिग है कि ऐसे किसी नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ताओं के नाम स्टेट बार काउंसिल को नहीं भेजे जायेंगे.नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ता बनते रहे हैं वोट बैंक दरअसल, संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि ऐसे नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ता संघ के लिये वोट बैंक का काम करती है और कई ऐसे लोगों को ये फर्जी अधिवक्ता संघ के चुनाव में जीतने में सहायक होते हैं. जिसे जीतने के पश्चात संघ के कार्यों में ना तो अभिरुचि होती है ना ही कभी संघ के कार्य-कलापों में भाग लेते हैं. फलस्वरूप नियमित अधिवक्ताओं की समस्याओं को वे नहीं उठा पाते हैं.तीस प्रतिशत फर्जी अधिवक्ताओं को बीसीआइ ने भी स्वीकारा अभी हाल ही में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा था कि सभी स्थानीय अधिवक्ता संघों में 30 प्रतिशत फर्जी एवं नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ताओं के नाम शामिल है. जिसे हटाया जाना आवश्यक है. कई ऐसे अधिवक्ता संघ में नामांकित हैं, जो दुकान चला रहे हैं अथवा एलआइसी के एजेंट हैं या अन्य कार्यों में संलग्न हैं. जिससे अधिवक्ताओं की गरिमा को ठेस पहुंचता है. विगत वर्षों में ऐसा देखा गया है कि कई आपराधिक किस्म के लोग भी अधिवक्ता बन कर सिर्फ अपने को सुरक्षित रख कर संघ में नामांकित हो रहे हैं.गिरेगी गाज फर्जी अधिवक्ताओं परफर्जी अधिवक्ताओं ने अब तक लोगों को चकमा देकर और रौब दिखा कर स्वयं को अधिवक्ता कहते हैं. ऐसे लोग अपने निजी वाहनों पर अधिवक्ता का लोगो या स्टीकर लगा कर अथवा नंबर प्लेट पर एडवोकेट लिखा कर समाज में बेधड़क घूमते हैं. लेकिन अब ऐसी फर्जी अधिवक्ताओं की खैर नहीं. लेकिन संघ ने सामाजिक स्तर पर ऐसे फर्जी एवं नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ताओं के विरुद्ध अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है, जो स्वयं को अधिवक्ता कहने का दंभ भरते हैं. संघ के सचिव विजय कुमार झा का कहना है कि सामाजिक स्तर पर लोगों को ऐसे फर्जी अधिवक्ताओं को स्थान नहीं देकर बहिष्कृत करना चाहिए तथा इनके अपूर्ण एवं गलत सलाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए. ऐसे फर्जी अधिवक्ताओं की सूचना तुरंत संघ को मिलनी चाहिए.
30 प्रतिशत से अधिक नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ता के नाम संघ से हटाये जा सकते हैं
30 प्रतिशत से अधिक नॉन प्रैक्टिसींग अधिवक्ता के नाम संघ से हटाये जा सकते हैं प्रतिनिधि, कटिहारसर्टिफिकेट ऑफ प्लेस ऑफ प्रैक्टिस एंड (वेरीफिकेशन) रूल्स 2015 के तहत अधिवक्ता संघ कटिहार में आवेदन पत्र लेने की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो गयी. लगभग 1200 अधिवक्ताओं से अधिक नामांकन रहने के बावजूद अंतिम जानकारी मिलने तक […]
