एक बेटे की दरवाजे पर रखी थी लाश, तो दूसरा जीवन व मौत के बीच झूल रहा
रंजू व सुमन यादव की तो दुनिया ही उजड़ गयी
अनियंत्रित ट्रैक्टर ने बच्चे को मौत की नींद सुलाया
मनसाही : विशुनपुर गांव के लिए मंगलवार का दिन अमंगलकारी साबित हुआ. सुबह जब सभी लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे, तभी सुमन यादव के दरवाजे पर ट्रैक्टर यमराज बन कर पहुंचा और पल भर में ही उनकी खुशियां छीन लीं. कुछ समय पहले उनका लाडला बजरंगी (05) जो चाचा राजेश के साथ पर मचान पर बैठ कर हंस-हंस कर बातें कर रहा था, वह अब हमेशा के लिए सो गया था, वहीं दूसरा बेटा दिवाकर (07) जीवन व मौत के बीच झूल रहा है. इस हृदयविदारक घटना को देख सुमन के घर समेत पूरे गांव में चीख-पुकार मच गयी. जिसने भी घटना के बारे में सुना, वह सुमन यादव के घर की तरफ दौड़ पड़ा. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे. कुछ लोग घायलों को लेकर अस्पताल की तरफ भागे, तो कुछ दुखी परिजनों को संभालने में जुट गये, पर बजरंगी की मां रंजू को संभालना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा था.
बेटे की लाश देख रंजू हुई बेसुध
रंजू की चीत्कार लोगों को अंदर तक बेध रही थी. वह बजरंगी को बाहों में भर कर बार-बार उठने की रट लगा रही थी. यह दृश्य देख वहां उपस्थित लोग अपनी भावनाओं को काबू में रख नहीं पा रहे थे. महिलाएं उसे बजरंगी के शव के पास से हटा रही थीं, लेकिन वह बार-बार उसके शव से लिपट कर दहाड़ मार कर रोने लगती. वह उसे गोद में लेकर कहती उठ न बेटा, कब तक सोयेगा. यह दृश्य लोगों को विचलित कर रहा था. सुमन सुबह ही बच्चों को हंसते खेलते छोड़ कर भैंस को लेकर दियारा की तरफ गये थे. उन्हें लोगों ने घटना की जानकारी नहीं दी, लेकिन यह कह कर बुलाया की जल्दी घर पहुंचिये. सुमन भी अनहोनी के भय से घर की तरफ दौड़ पड़े. घर पहुंचे, तो रोने-चीखने की आवाज सुन वह अंदर से हिल गये. जैसे ही दरवाजे पर पहुंचे, तो बेटे बजरंगी का शव देख दहाड़ मार कर रोने लगे. थानाध्यक्ष शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज आगे की कार्रवाई में जुटे थे.
