एक दिन पहले निगरानी के एएसआइ के साथ घूस के पैसे की बातचीत के लिए थाने पहुंची थी पीड़िता

= सादे लिबास में मौजूद निगरानी के एएसआइ समाने गिरफ्तार दोनों सब इंस्पेक्टर ने मांगा था 40000 घूस

= घुस के पैसे के लिए आरोपित के फोन पर बार-बार दोनों सब इंस्पेक्टर करते थे फोन प्रतिनिधि, भगवानपुर पीड़िता चांदनी की शिकायत पर निगरानी के एएसआइ मणिकांत एक दिन पहले मंगलवार की शाम 7:30 बजे भी भगवानपुर थाने में सादे लिबास में पीड़िता के साथ गये थे, जहां पर सब इंस्पेक्टर लकी आनंद व राशिद कमाल के द्वारा एएसआइ मणिकांत के मौजूदगी में उक्त दोनों सब इंस्पेक्टर के द्वारा 40000 रुपये की मांग केस में मदद पहुंचाने व गिरफ्तार नहीं करने के लिए किया गया था. उक्त शिकायत की सत्यता की जांच जब हो गयी, तब एएसआइ मणिकांत की रिपोर्ट पर डीएसपी करी नेतृत्व में सात सदस्य टीम का गठन गिरफ्तारी के लिए किया गया था. भगवानपुर थाने में दर्ज कांड संख्या 128/ 25 जो कि पतरिया की अमित कुमार द्वारा फर्जीवाड़ा एवं एससी एसटी एक्ट का दर्ज कराया गया था. इसमें प्रताप ऑटो बजाज एजेंसी के मालिक प्रिंस कुमार सिंह व सूरज कुमार सिंह के ऊपर दर्ज कराया गया था. उसी मामले में आरोपी प्रिंस कुमार सिंह व सूरज कुमार सिंह को गिरफ्तार नहीं करने एवं मदद पहुंचाने के नाम पर सब इंस्पेक्टर लकी आनंद एवं राशिद कमाल के द्वारा 40000 रुपये घुस मांगा जा रहा था. इसकी शिकायत प्रिंस कुमार सिंह की पत्नी चांदनी के द्वारा निगरानी थाने में 02 जून को किया गया था. इनकी शिकायत पर निगरानी के एएसआइ मणिकांत के द्वारा 33/ 2025 दो जून को प्राथमिकी दर्ज करते हुए मामले के सत्यापन के लिए भगवानपुर मणिकांत भगवानपुर आ गये थे. वह अपनी मौजूदगी में घूस मांगने के बातचीत का सत्यापन करना चाहते थे. इसके लिए वह 02 जून को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से पीड़िता के साथ सादे लिबास में मौजूद रहकर दोनों सब इंस्पेक्टर की पहचान व उनके बातचीत को रिकॉर्ड करना चाहते थे. इसके लिए निगरानी के एएसआइ मणिकांत पीड़िता चांदनी सिंह को कहा कि वह दोनों सब इंस्पेक्टर से बात कर उनसे मिले और फिर उनसे घुस के बाबत बात करें जब चांदनी सिंह ने घूस की बाबत बात करने के लिए दोनों सब इंस्पेक्टर को फोन किया गया, तो मंगलवार की शाम 7:30 बजे मुलाकात होने की बात कही गयी. जिसके बाद शादी लिबास में एएसआइ के साथ चांदनी सिंह भगवानपुर थाने में दोनों सब इंस्पेक्टर से बात करने के लिए पहुंची मंगलवार की शाम में दोनों सब इंस्पेक्टर में निगरानी के एएसआई मणिकांत के मौजूदगी में केस में मदद पहुंचाने और गिरफ्तारी नहीं करने के लिए 40000 रुपये की मांग की. निगरानी की टीम 2 जून को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद से दोनों सब इंस्पेक्टर को गिरफ्तार करने के फिराक में लगी हुई थी. घटना के सत्यापन के बाद निगरानी में रहता है किया कि बुधवार की सुबह में पीड़िता का स्टाफ पैसे लेकर जायेगा और इस वक्त उसे गिरफ्तार कर लिया जायेगा .योजना के मुताबिक बुधवार की सुबह करीब 10:00 बजे पीड़िता का स्टाफ 40000 रुपये लेकर गया और सब इंस्पेक्टर राशिद कमाल को सब इंस्पेक्टर लकी आनंद के मौजूदगी में पैसा दिया और वहीं पर निगरानी के द्वारा उन्हें दबोच लिया गया. = दोनों सब इंस्पेक्टर को कब्जे में लेने के लिए निगरानी को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत घूस का पैसा लेने के साथ ही जब निगरानी की टीम में उन्हें पैसे के साथ पकड़ा, तो थाने के प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सब इंस्पेक्टर लकी आनंद के द्वारा जबरन या प्रयास किया गया कि वह किसी तरह से निगरानी के चंगू से अपने आप को छुड़ा लें और इसके लिए उनके द्वारा खूब जोर जबरदस्ती की गयी, लेकिन निगरानी की टीम ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें अपने कब्जे में लिया. इस दौरान निगरानी की टीम को उक्त दोनों सब इंस्पेक्टर को कब्जे में लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. = वाट्सएप कॉल पर मांगते थे घूस की रकम उक्त दोनों पुलिसकर्मी घुस की रकम वाट्सएप कॉल पर रुपये मांगा करते थे. चांदनी सिंह ने अपने शिकायत में कहा है कि जब अमित कुमार फाइनेंस का पैसा फर्जीवाड़ा करने व जाति सूचक गाली देने का आवेदन थाने में दिया गया था. इसके बाद से ही लकी आनंद व राशिद कमाल द्वारा उनके पति प्रिंस कुमार सिंह के मोबाइल पर वाट्सएप कॉल कर मामले को मैनेज करने के लिए घूस की मांग की जा रही थी. जब प्रिंस पैसा देने के लिए तैयार नहीं हुई तब उनके द्वारा 24 मई को प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी. प्राथमिक की दर्ज करने के बाद उक्त मामले में मदद पहुंचाने एव गिरफ्तारी नहीं करने के के नाम पर बार-बार वाट्सएप कॉल कर घूस के पैसे मांगे जा रहे थे. घूस का पैसा मांगने के लिए दोनों सब इंस्पेक्टर हमेशा वाट्सएप कॉल किया करते थे, ताकि उनका कॉल रिकॉर्ड नहीं हो सके. घूस मांगने के मामले में उक्त दोनों सब इंस्पेक्टर काफी एक्स्पर्ट थे और उनके अंदर किसी प्रकार का कोई डर नहीं था. घूस मांगने के मामले में उनके बेखौफ होने के कारण ही निगरानी के टीम के द्वारा बड़े आसानी से उन्हें घुस की रकम के साथ रंगे हाथ दोनों लोगों को एक कहीं जगह पर गिरफ्तार कर लिया गया = घूस मांगने को लेकर दोनों सब इंस्पेक्टर में नहीं दिखा किसी बात का डर घूस मांगने को लेकर दोनों सब इंस्पेक्टर पूरी तरह से बेफ्रिक देख रहे थे. घूस का पैसा खाने के लिए वही इतने बेताब थे कि वह आरोपित को लगातार फोन करके उन्हें मदद पहुंचाने के नाम पर घूस की मांग कर रहे थे. उन्हें इस बात का कोई डर नहीं था कि वह कभी पकड़े भी जा सकते हैं. मंगलवार की शाम को पीड़ित चांदनी सिंह के साथ निगरानी के भी पुलिस अधिकारी सादे लिबास में मौजूद थीं1 लेकिन दोनों सब इंस्पेक्टर बेखबर होकर उनके सामने ही घूस की मांग कर रहे थे. उन्हें इस बात का कोई डर नहीं था कि वह पकड़े जायेंगे. दोनों पुलिस वालों के द्वारा घूस को लेकर बातचीत जिस तरह से की जा रही थी, तो यही लगा कि उन्हें ऐसा लग रहा था कि वह पुलिस वाले हैं उन्हें कौन पकड़ सकता है घूस लेना उनका अधिकार है.

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Author: PANCHDEV KUMAR

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