Kaimur News (राजू कुमार): रामपुर प्रखंड क्षेत्र के सभी गांवों में शनिवार को वट सावित्री व्रत पूजा हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई. ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व में सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा.
बरगद वृक्ष की विधि-विधान से हुई पूजा
जानकारी के अनुसार, वट सावित्री व्रत के अवसर पर महिलाओं ने बरगद (वट) वृक्ष की पूजा-अर्चना की और सावित्री और सत्यवान की कथा को सुना. पूजा सामग्री में सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां, धूप, दीप, घी, बांस का पंखा, लाल कलावा, सुहाग सामग्री, कच्चा सूत, भीगा हुआ चना, बरगद का फल और जल से भरा कलश शामिल था.
घर की सफाई के बाद शुरू हुई पूजा
व्रती महिलाओं विमला देवी, मालती देवी, जानकी देवी सहित दर्जनों महिलाओं ने बताया कि सुबह घर की सफाई कर स्नान के बाद पूरे घर में पवित्र जल का छिड़काव किया गया. इसके बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्मा जी की मूर्ति स्थापित की गई. ब्रह्मा जी के बाईं ओर सावित्री की प्रतिमा रखी गई, जबकि दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की मूर्तियां स्थापित कर उन्हें वट वृक्ष के नीचे ले जाया गया.
वट वृक्ष की परिक्रमा कर मांगा अखंड सौभाग्य
महिलाओं ने वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित कर मौली, रोली, फूल, धूप और भीगे चने से पूजा की। इसके बाद वट वृक्ष के तने पर कच्चा सूत लपेटकर तीन बार परिक्रमा की गई. पूजा के दौरान महिलाओं ने बड़ के पत्तों से बने गहने धारण कर वट सावित्री की कथा सुनी.
सास का आशीर्वाद लेकर किया व्रत पूर्ण
पूजा के बाद महिलाओं ने भीगे हुए चनों का बायन निकालकर उसमें नकद राशि रखी और अपनी सास के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया. वहीं, ब्राह्मणों को वस्त्र, फल एवं अन्य सामग्री बांस के पात्र में रखकर दान दिया गया. व्रत के दौरान सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण भी किया गया.
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