40 घरों की आबादी एक निजी सबमर्सिबल व खराब चापाकलों के भरोसे नल-जल योजना महीनों से बंद, संवेदक व विभाग ने फेरा मुंह अधौरा. प्रखंड के एक डिहवा उरांव टोले पर लगभग 40 घरों की आबादी रहती है. इस टोले पर नल-जल योजना के तहत सबमर्सिबल तो लगाया गया है, लेकिन किसी के घर तक अब तक नल की टोंटी नहीं लगाये गये हैं, जिससे यह योजना सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गयी है. लगभग दो माह से यह काम बंद पड़ा है. आलम यह है कि इस टोले पर मात्र एक घर में निजी सबमर्सिबल लगा है, जहां टोले की महिलाएं पानी भरने के लिए सुबह-शाम बाल्टी व डब्बे लेकर कतार में खड़ी रहती हैं. बिजली कट जाने पर स्थिति और भी भयावह हो जाती है. इस टोले पर तीन चापाकल भी हैं, लेकिन वे भी बहुत दिनों से खराब पड़े हुए हैं. कुछ यही स्थिति अधौरा प्रखंड अंतर्गत कई गांवों में बनी हुई है, जहां अधिकांश नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं. ठेकेदार द्वारा सबमर्सिबल चलाने के लिए जो पैनल लगाये गये हैं, उनमें से अधिकांश खराब हो चुके हैं. कहीं सिनटैक्स की टंकी फटी हुई है, तो कहीं अन्य तकनीकी कारणों से जलापूर्ति ठप है. गर्मी के दौरान प्रखंड के विभिन्न गांवों में पानी की किल्लत काफी बढ़ गयी है, लेकिन संवेदक द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. यदि इन योजनाओं को दुरुस्त कर दिया जाये, तो ग्रामीणों को राहत मिल सकती है. बीएसपी नेता अवधेश कुमार यादव ने बताया कि अधौरा प्रखंड क्षेत्र में अधिकतर नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हुई हैं, जिससे भीषण गर्मी में पानी की भारी समस्या उत्पन्न हो गयी है. उन्होंने जिला प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि जहां भी योजनाएं बंद हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर चालू किया जाये. इस संबंध में विभाग के कनीय अभियंता बिभाष कुमार से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन नेटवर्क में खराबी होने के चलते उनसे बात नहीं हो पायी.
अधौरा के उरांव टोले पर पानी के लिए मचा हाहाकार
40 घरों की आबादी एक निजी सबमर्सिबल व खराब चापाकलों के भरोसे
