18 साल बाद भी आंगनबाड़ी केंद्र तक जाने के लिए नहीं बना रास्ता

पसाई गांव के वार्ड नंबर एक और वार्ड नंबर दो का आंगनबाड़ी केंद्र उत्क्रमित मध्य विद्यालय की भूमि पर भवन का निर्माण करा संचालन किया जाता है

रामपुर. रामपुर प्रखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी पर पसाई गांव के वार्ड नंबर एक और वार्ड नंबर दो का आंगनबाड़ी केंद्र उत्क्रमित मध्य विद्यालय की भूमि पर भवन का निर्माण करा संचालन किया जाता है. वार्ड दो का आंगनबाड़ी केंद्र वर्ष 2007 से और वार्ड एक का आंगनबाड़ी केंद्र 2015 से भवन बनाकर संचालित किया जा रहा है. यहां लगभग 18 साल बाद भी दोनों आंगनबाड़ी केंद्र को अपना कोई रास्ता नहीं है. वार्ड दो की सेविका धर्मावती देवी व वार्ड एक की सेविका शारदा कुमारी का कहना है कि प्रतिदिन बच्चे कीचड़ में गिर कर मिट्टी से ड्रेस लिटा कर केंद्र पर आते हैं. रास्ता नहीं होने से अगल बगल के लोगों द्वारा भैंस-गाय बंधी रहती है, उसी रास्ते से बच्चे केंद्र आते हैं. इतना ही नहीं नौनिहालों को कब पशु घायल कर दें, कुछ कहा नहीं जा सकता. आंगनबाड़ी केंद्र के छोटे बच्चों व सेविका, सहायिका के आने-जाने के लिए रास्ता ही नहीं है, जिससे बच्चे बरसात तो बरसात अन्य मौसम में जिस रास्ते से केंद्र आते-जाते हैं कीचड़ से सना रहता है और गिर कर घायल होते रहते हैं. केंद्र पर आने वाले बच्चों की उम्र तीन से छह साल के बीच ही लगभग बतायी जाती है. बाल विकास परियोजना या अन्य योजना के माध्यम से सरकार द्वारा केंद्र चलाये जाने का भरपूर प्रयास जारी है, लेकिन रास्ते के अभाव में बच्चों का भविष्य अंधकारमय दिख रहा है. जिस रास्ते से बच्चे केंद्र आते जाते है, वह कीचड़ से सना रहता है. इस कारण बहुत बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र जाना ही नहीं चाहते है या नहीं जा पाते हैं. आंगनबाड़ी केंद्र के रास्ते के लिए गांव के कुछ लोगों का कहना है कि केंद्र का रास्ता भवन जो बना है, उसके पीछे से है. कुछ लोगों का कहना है कि भवन का रास्ता आगे से है. इस पेच में 18 साल बाद भी केंद्र का रास्ता ही नही बन पाया है. पसाई पंचायत में प्रखंड मुख्यालय भी पड़ता है. दोनों केंद्र की सेविका, सहायिकाओं द्वारा जनप्रतिनिधि वार्ड मुखिया व प्रखंड मुख्यालय तक मौखिक गुहार लगाी गयी, लेकिन 18 साल बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हुआ. ..पसाई गांव के वार्ड एक व दो के आंगनबाड़ी केंद्र का मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय की भूमि पर भवन निर्माण करा चल रहा केंद्र

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Author: VIKASH KUMAR

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