kaimur News : रोजगार सेवकों को सौंपी गयी गांवों के कुओं का भू-जलस्तर नापने की जिम्मेदारी

मनरेगा के पंचायत रोजगार सेवकों को अब मिलेगा जलदूत का भी दर्जा

भभुआ. जिले में मनरेगा योजना के तहत कार्य कर रहे पंचायत रोजगार सेवकों को अब जलदूत का भी दर्जा दिया जायेगा. सरकार ने पंचायत रोजगार सेवकों को गांवों के कुओं का जलस्तर लेने की भी जिम्मेदारी सौंप दी है. इसे लेकर मनरेगा आयुक्त बिहार सरकार अभिलाषा कुमारी द्वारा सभी जिला पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम समन्वयक मनरेगा को निर्देश जारी किया गया है. इधर, सरकार स्तर से जारी पत्र में कहा गया है कि लगातार भू-जल निकासी से भू-जलस्तर में काफी कमी आ रही है. जिस पर लगातार नजर रखते हुए भू-जल स्तर के कमी वाले इलाकों में सुधार लाया जा सकता है. लेकिन, भू-जल स्तर के गहराई को जानने के लिए मौजूदा गहराई की मापी आवश्यक है. इसकी आवश्यकता को समझते हुए ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज विभाग भारत सरकार ने साझा रूप से जल दूत एप विकसित किया है. इसके माध्यम से भू-जलस्तर की जानकारी प्राप्त करने के बाद उक्त इलाकों में जल संग्रहण और संरक्षण की विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन कराके भू जल-स्तर को बढ़ाया या स्थिरता प्रदान किया जा सकता है. गौरतलब है कि लगातार नीचे जा रहे भू-जलस्तर का लेबल सरकार के लिए चिंता का बड़ा सबब बनता जा रहा है. इसको लेकर बिहार सरकार की ओर से लगातार भू-जलस्तर को मेंटेन रखने या बढ़ाने के लिए जल जीवन हरियाली अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और संग्रहण को लेकर पोखरों तालाबों, आहर, पइन, सोख्ता आदि का निर्माण या जीर्णोद्धार कराया जा रहा है. बावजूद इसके पहाड़ी जिला कैमूर के अधौरा के पहाड़ी इलाकों सहित कुछ अन्य प्रखंडों के मैदानी इलाकों में भी भू-गर्भ जलस्तर नीचे जाने से गर्मी, तो दूर जाडे के मौसम में ही पेयजल समस्या शुरू हो जाती है. = प्रत्येक गांव के चिह्नित कुओं से वर्ष में दो बार भू-जलस्तर की होगी मापी जलदूत एप के माध्यम से प्रत्येक गांव के दो-तीन चिह्नित कुओं के जलस्तर का माप इस एप के माध्यम से करेंगे. भू-जलस्तर का माप वर्ष में दो बार किया जायेगा. पहला माप बरसात का सीजन आने के पूर्व और दूसरा माप बरसात का सीजन समाप्त होने के बाद किया जायेगा. साथ ही वैसे गांव जहां सरकारी कर्मियों द्वारा कुओं का सर्वेक्षण किया जाना है. उन कर्मियों को भी तत्काल जल दूत पोर्टल पर डिवाइस के माध्यम से रजिस्टर्ड कराना सुनिश्चित किया जाये. इन्सेट भू-जलस्तर से निबटने के लिए पीएचइडी विभाग ने भी उठाया है कदम भभुआ. पहाड़ी जिले कैमूर में पेयजल की गंभीर समस्या को देखते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने भी भू-जलस्तर को लेकर कदम उठाया है. विभाग ने कार्यपालक अभियंताओं को भू-जलस्तर भागने वाले क्षेत्रों का सर्वे कराने का भी निर्देश दिया था. पत्र में कहा गया था कि सभी पंचायतों में जल संकट के सही मापी का आकलन किया जाये. यह भी देखा जाये कि उस क्षेत्र में किस तरह का जल संकट उत्पन्न हो सकता है, ताकि उसका अध्ययन कर समय रहते निदान सुनिश्चित कराया जा सके. निर्देश में कहा गया था कि ऐसे क्षेत्रों की पड़ताल शुरू करा दी जाये. जहां सरकारी चापाकल या प्राववेट चापाकल बंद होने लगे हों. यही नहीं जिन क्षेत्रों में टैंकर से जलापूर्ति करायी जानी हो उन क्षेत्रों को भी चिह्नित कर लिया जाये. इसके बाद सरकार के निर्देश के आलोक में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से भू-जलस्तर का सर्वे हर माह में कराया जाना है.

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Author: PANCHDEV KUMAR

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