Kaimur News : न पीने, न ही मुंह धोने लायक है नल जल योजना का बदबूदार पानी

शहर के वार्ड नंबर सात में सरकारी नल जल योजना का पानी न तो पीने लायक, न ही मुंह धोने लायक है.

भभुआ. शहर के वार्ड नंबर सात में सरकारी नल जल योजना का पानी न तो पीने लायक, न ही मुंह धोने लायक है. बदबूदार पानी के कारण लोगों ने नल जल योजना के पानी का प्रयोग करना ही छोड़ दिया है. गौरतलब है कि शहर के वन विभाग पुलिया से जा रहे सीवों नहर रोड पर वार्ड सात की पुलिया के पास सरकार की नल जल योजना का टावर बैठाया गया है. टावर का निर्माण पुलिया के पास ही स्थित पाकड़ के पेड़ की बगल में किया गया है. टावर पर सिनटैक्स की दो टंकी भी बैठायी गयी है और टावर के नीचे योजना को चालू और बंद करने के लिए स्टार्टर बॉक्स भी लगाया गया है. यहां से मोटर को चालू करने पर टंकी में पानी भरता है. पर, टंकी के ऊपर का ढक्कन आज तक नहीं लगाया गया है, जिसके कारण इस नल जल योजना के पानी से निकल रही बदबू के कारण ग्रामीणों ने इसके पानी का प्रयोग करना ही बंद कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि नल जल योजना के पानी टंकी को भर जाने के बाद भी जल्दी बंद नहीं किया जाता है, ताकि टंकी के पानी का गंदगी ओवरफ्लो हो कर बह जाये, लेकिन, इस टेंपररी उपाय से भी पानी से गंदगी बाहर नहीं निकल पाती है. क्योंकि, भारी मात्रा में गंदगी व गाद टंकी के निचले तल पर पूरी तरह बैठ चुका है. गौरतलब है कि योजना के टावर के नीचे लगे शिलापट्ट पर योजना की प्राक्कलित राशि 12 लाख चार हजार तथा शिलापट्ट पर वार्ड सात के वार्ड सदस्य मनोज सिंह, नगर सभापति व नगर उप सभापति का नाम भी अंकित है. – कहते हैं लोग – वार्ड सात के रामबचन यादव का कहना है कि यह टंकी उनकी ही जमीन में उनके घर की बगल स्थित पाकड़ के पेड़ के नीचे बैठायी गयी है. इस योजना को इसी साल चालू किया गया. योजना चालू होने के पहले उनसे वार्ड पार्षद ने जमीन मांगा था और कहा था कि योजना को चालू और बंद करने का काम करिये, आपको सरकार रुपये देगी. लेकिन आज तक हमें एक भी रुपया नहीं मिला. वर्तमान में इस टंकी का पानी बदबू देता है, जो पीने लायक नहीं है. इससे नहर पर रहने वाले कई घरों के सामने पानी की गंभीर समस्या है. क्योंकि टंकी के उत्तर नहर के पूर्वी छोर पर लगाये गये दो सरकारी चापाकल भी कई माह से खराब है. इसकी शिकायत भी पीएचइडी में की गयी, लेकिन आज तक चापाकल नहीं बना. – ग्रामीण अनिता देवी पति नागेंद्र कुमार का कहना है कि टंकी के ऊपर ढक्कन ही नहीं लगवाया है. टावर पर टंकी के ऊपर पाकड़ के पेड़ के डालें लटकती हैं. ढक्कन नहीं होने के कारण दोनों टंकी में पाकड़ के पेड़ का गोदा और पेड़ पर बैठने वाले विभिन्न पक्षियों का विष्टा पानी में गिरते रहता है. जो टंकी के नीचे के तल पर जाकर बैठ गया है. इससे टंकी का पानी बहुत बदबू देता है. इस पानी को पीना तो दूर की बात है. अगर इस पानी से कपड़े भी फींच लिये जाते हैं, तो कपड़े भी करवाइन और गंदा बदबू देने लगता है. काफी धूप दिखाने के बाद ही कपड़ों से बदबू बाहर निकलती है.

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