Kaimur News : बिना रजिस्ट्रेशन मोहनिया में संचालित हो रहे दर्जनों अस्पताल

फर्जी अस्पताल पर पहले की गयी होती कार्रवाई, तो शायद बच सकती थी प्रसूता की जान, अस्पताल उपाधीक्षक बोले- शहर में बिना निबंधित निजी अस्पतालों की बनायी जा रही सूची, होगी कार्रवाई

मोहनिया. शहर मोहनिया में फर्जी अस्पतालों पर प्रशासन ने पहले कार्रवाई होती, तो शायद प्रसूता श्वेता कुमारी की जान बच सकती थी. प्रसूता की मौत के बाद प्रशासन ने भले ही फर्जी अस्पताल को सील कर कार्रवाई की है. लेकिन, इसके पहले किसी की नजर ऐसे फर्जी अस्पतालों पर नहीं पड़ी थी. जबकि, जीटी रोड व दुर्गावती सर्विस सड़क के किनारे बड़ा-बड़ा बोर्ड लगाकर जय मां मुंडेश्वरी हॉस्पिटल के नाम से फर्जी अस्पताल संचालित किया जा रहा था. सबसे अहम बात यह सामने आयी कि इस अस्पताल का संचालक डॉ कविता कुमारी, स्त्री रोग विशेषज्ञ लिखा हुआ था. अस्पताल से मिले विजटिंग कार्ड पर डॉ विवेक सिंह (बीएएमएस), डॉक्टर नितिन यादव (एमबीबीएस डीएनबी), डॉक्टर बिन्नी सिंह (एमएस) लिखा हुआ था. लेकिन सवाल अब यह खड़ा होता है कि इतने डॉक्टर के नाम तो लिखे गये हैं, लेकिन क्या अस्पताल में इतने डॉक्टर कभी आते थे या नहीं. यह तो जांच का विषय है. लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इन अस्पतलों की जांच तक नहीं करते है़ं सबसे हैरानी की बात है कि जिस फर्जी अस्पताल में प्रसूता की मौत हुई, वह अनुमंडलीय अस्पताल के ठीक सामने स्थित है. लेकिन, स्वस्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अब तक जांच तक नहीं की. और अंतत: उस फर्जी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत हो गयी.

जगह और नाम बदल कर संचालित किये जा रहे फर्जी अस्पताल

मोहनिया शहर में हरेक मुहल्ले में फर्जी अस्पताल खोलकर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. इसका उदाहरण है कि मोहनिया के कौड़ीराम गांव निवासी चंदन कुमार की 30 वर्षीय पत्नी श्वेता कुमारी की प्रसव के दौरान हो गयी थी. यह कोई पहला मामला नहीं था. इसके पहले भी फर्जी अस्पतालों में मरीजों की जान जा चुकी है. लेकिन, कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं होता है. लेकिन इतना जरूर होता है कि नाम और जगह दोनों बदलकर दूसरे जगह फर्जी अस्पताल खोल खुलेआम संचालित करते हैं. सबसे हैरानी की बात है कि अनुमंडलीय अस्पताल प्रशासन के पास जानकारी तक नहीं है कि शहर में कितने निबंधित और फर्जी तरीके से अस्पताल संचालित हो रहे हैं. अब महिला की मौत के बाद जांच करने की बात कही जा रही है.

मोहनिया में अवैध क्लिनिक खोल झोला छाप करते है ऑपरेशन

अनुमंडल मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक दर्जनों अबैध क्लीनिक चल रहे हैं, जिसमे प्रतिदिन भोले-भाले लोगों को अपने झांसे में लेकर कई तरह के आपरेशन करते हैं. इससे मरीजों की जान चली जाती हैं. शहर में बिना रोक-टोक के अवैध रूप से क्लीनिक और अस्पतालों का संचालन किया जा रहा हैं. बिना स्पेस्लिस्ट डॉक्टर के ही ऑपरेशन किया जाता हैं. इससे मरीजों की जान जाती है. इधर, स्वास्थ्य विभाग एक दो क्लीनिक में जांच कर कोरम पूरा कर लेता है. लेकिन, मोहनिया में कई ऐसे अवैध क्लिनिक संचालित है, जहां अस्पताल के बाहर बड़े-बड़े डाक्टरों का नाम लगा मामूली डिग्री वाले डॉक्टर महिलाओं का सिजेरियन कर रहे हैं. सिजेरीयन करने के लिए विशेषज्ञ होना जरूरी है. अलट्रासाउंड, जांच घर आदि बिना मानक व बिना अनुमति के चल रहे हैं.

अवैध क्लिनिक में आपरेशन के दौरान कई लोगों का हो चुकी है मौत

मोहनिया शहर में अवेध क्लीनिक व अस्पतालों में आपरेशन के दौरान कई मरीजों की मौत हो चुकी हैं. 2008 में पीएनबी बैंक के समीप स्थित एक अवेध क्लीनिक में भोखरी के चर्चित व्यक्ति के हाइड्रोसील का ऑपरेशन किया गया था. ऑपरेशन के दौरान बेहोश करने के बाद उन्हें होश ही नहीं आया था और उनकी मौत हो गयी थी. उस समय काफी बवाल हुआ था. इसमे मोहनिया के ही क्लीनिक संचालक पर प्राथमिकी हुई थी. लेकिन, अब तक कोई ठोस करवाई नहीं हुई. वर्ष 2020 में अनुमंडल कार्यालय को जाने वाली सड़क के किनारे स्थित एक अवैध क्लीनिक में महिला का प्रसव किया गया था, जिसे खून की कमी थी. जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो उसे रेफर कर दिया गया था. उसकी रास्ते में मौत हो गयी थी. उस समय भी परिजन काफी हंगामा किये थे. लेकिन, प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी. इसके साथ ही प्रखंड के कई मरीज झोलाचाप डाॅक्टर के चककर में पड़ जान गंवा देते हैं. इसका शिकायत थाना व विभाग में नहीं हो पाती है, जिन्हे संचालक द्वारा पैसा का लालच देकर मैनेज कर दिया जाता है.

झोलाछाप डाॅक्टर सर्जन बन करते हैं आपरेशनमोहनिया शहर में कई ऐसे झोलाछाप डॉक्टर हैं, जो सर्जन बन मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हैं. कई फर्जी क्लीनिकों में हाइड्रोसील, बावसीर, अपेंडिक्स आदि संवेदनशील ऑपरेशन किये जाते हैं, ये लोग मरीजो को कम खर्च में लालच दे कर फसा लेते हैं, जानकारी नहीं होने के कारण मरीज झांसा में आ जाते है और अपना झोला छाप के चक्कर में पड़ जान गवाने को मजबूर रहते है. जबकि, सबसे बड़ी बात यह हैं अबैध रूप से क्लीनिक खोल कर बड़े डॉक्टर के नाम बोर्ड पर लिखवा कर लोगों का स्वयं अपने ऑपरेशन करते हैं. इसका जानकग स्वास्थ्य विभाग द्वारा करना मुनासिब नहीं समझती है.

क्या कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

इस संबंध में अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर विजय कुमार ने बताया कि मोहनिया शहर में जितने भी अस्पताल संचालित हैं, उनकी सूची बनायी जा रही है. इसमें कितने अस्पताल विभाग से रजिस्ट्रेशन लिये हैं और कितने फर्जी तौर पर चल रहे हैं, दोनों तरह के निजी अस्पतालों की सूची तैयार की जा रही है. इसके बाद कार्रवाई की जायेगी.

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Author: PANCHDEV KUMAR

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