टीबी के मरीजों को दवा के साथ पौष्टिक आहार लेने की जरुरत

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिले भर में टीबी के इलाजरत मरीजों को निक्षय मित्रों के माध्यम से फूड बास्केट उपलब्ध कराया जा रहा है.

भभुआ सदर. प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिले भर में टीबी के इलाजरत मरीजों को निक्षय मित्रों के माध्यम से फूड बास्केट उपलब्ध कराया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने जिले से टीबी रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए शुरू किये गये इस अभियान में टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है. जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ रविंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि टीबी की बीमारी किसी को कभी भी हो सकती है. टीबी को लेकर अभी भी लोगों में कई भ्रांतियां हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है. यह बीमारी कई प्रकार से होती है, जबकि लक्षणों की जल्दी पहचान कर दवा के पूरे कोर्स का सेवन करने से टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है. दवा के साथ खानपान पर भी विशेष रूप से ध्यान दिया जाये, तो छह महीने के अंदर एक टीबी मरीज अपनी बीमारी पर आसानी से विजय प्राप्त कर सकता है. = मरीजों के लिए जिले में 69 निक्षय मित्र हैं कार्यरत डॉ चौधरी ने बताया कि जिले में अभी 69 निक्षय मित्र करीब 80 टीबी मरीजों को फूड बास्केट उपलब्ध कराकर उनकी पोषण जरूरतों का ध्यान रख रहे हैं. दृढ़ इच्छाशक्ति व एकजुटता का परिचय देते हुए अधिक से अधिक सक्षम लोगों व संस्थाओं को निक्षय मित्र बनकर समाज में आगे आने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि टीबी रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता एक स्वस्थ व्यक्ति के मुकाबले कमजोर होती है. इसके लिए दवा सेवन के साथ मरीजों को अपने आहार में पौष्टिक तत्वों को भी शामिल करने की जरूरत है. यहां निक्षय मित्रों द्वारा उपलब्ध करायी जा रही फूड बास्केट में पौष्टिक खाद्य वस्तुएं दी जाती हैं, जिससे उनकी पोषण की जरूरतों को पूरा किया जा सके. = टीबी मरीजों को गोद लेकर प्रस्तुत करें उदाहरण जिला संचारी रोग पदाधिकारी ने बताया कि निक्षय मित्र बनने के लिए लोगों से संपर्क किया जा रहा है. निक्षय मित्र बनने की इच्छा रखने वाले लोग जिला यक्ष्मा केंद्र से संपर्क कर या निक्षय मित्र के पोर्टल पर जा कर स्वयं अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. जिले में लोग निक्षय मित्र बनने के लिए आगे आ रहे हैं, लेकिन अभी और लोगों को आगे आने की जरूरत है. विदित हो कि योजना के तहत कोई भी स्वयंसेवी संस्था, राजनीतिक दल के लोग, गैर सरकारी संस्था के लोग या जनप्रतिनिधि तथा आमजन टीबी के मरीज को गोद ले सकते हैं. इस योजना के तहत छह महीना से लेकर तीन साल तक किसी भी ब्लॉक, वार्ड या जिले के टीबी रोगियों को गोद लेकर उन्हें भोजन, पोषण व आजीविका के लिए जरूरी मदद उपलब्ध करा सकते हैं.

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