नुआंव की महिला पर्यवेक्षिका का वेतन रोक मांगा गया स्पष्टीकरण

नुआंव के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को सुबह का नहीं दिया जाता नाश्ता

नुआंव के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को सुबह का नहीं दिया जाता नाश्ता भभुआ. नुआंव प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को सुबह का नाश्ता नहीं दिया जा रहा है व बच्चों का पोषाहार विद्यालय में भाड़े पर बनवाकर खिलाया जा रहा है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नुआंव प्रखंड की महिला पर्यवेक्षिका का वेतन रोकते हुए उनसे स्पष्टीकरण पूछा गया है. गौरतलब है कि जिले में बाल विकास परियोजना द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली का खुलासा वरीय पदाधिकारियों द्वारा किये जा रहे औचक निरीक्षण में सामने आ रहा है. इसी क्रम में 15 दिसंबर को जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आइसीडीएस रेखा कुमारी द्वारा नुआंव प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र महरो कोड संख्या 96 व केंद्र तरैथा एक कोड संख्या 39 का औचक निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान महरो आंगनबाड़ी केंद्र पर मात्र 17 बच्चे पाये गये, जिन्हें सुबह का नाश्ता नहीं दिया गया था. केंद्र पर नाश्ता तैयार करने की कोई व्यवस्था भी नहीं पायी गयी. वहीं, बच्चों का पोषाहार जलावन पर बनाते पाया गया. जबकि, सरकार द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य व पर्यावरण प्रदूषण से बचाव को लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों पर गैस चूल्हा उपलब्ध कराया गया है व सिलेंडर रिफलिंग के लिए राशि भी दी जाती है. इसके बावजूद धुएं वाले जलावन पर भोजन बनाना बच्चों के स्वास्थ्य के प्रतिकूल पाया गया. इसी तरह तरैथा एक आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान केंद्र पर बच्चे नदारद मिले. सेविका द्वारा बताया गया कि बच्चे खाना खाने गये हैं. जांच करने पर पाया गया कि बच्चे केंद्र परिसर के बाहर उबड़-खाबड़ जमीन पर बैठकर खाना खा रहे थे. वहीं, केंद्र पर पोषाहार बनाने की कोई व्यवस्था नहीं पायी गयी. इस पर पूछे जाने पर सेविका ने बताया कि पास के विद्यालय में शिक्षक को 3500 रुपये किराया देकर बच्चों को विद्यालय में बने भोजन को खिलाया जाता है. जबकि, विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्रों का मेनू अलग-अलग है. बावजूद इसके तीन से छह वर्ष के बच्चों को विद्यालय का भोजन खिलाना उनके शारीरिक व मानसिक विकास के लिए पोषणयुक्त नहीं माना जा सकता है. इस संबंध में डीपीओ आइसीडीएस रेखा कुमारी ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए नुआंव की महिला पर्यवेक्षिका विजया कुमारी के नवंबर माह का वेतन रोकते हुए उनसे स्पष्टीकरण पूछा गया है.

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Author: VIKASH KUMAR

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