फोटो 2 सुधांशु श्रीवास्तव 3 रामाशंकर यादव 4 जगत नारायण राम 5 हंसराज भारती 6 नदी किनारे फेंका गया कचरा प्रदूषण की मार: दुर्गावती व कर्मनाशा नदियों को स्वच्छ रखने की कवायद कागजों तक ही सीमित नदियों में प्रदूषण की समस्या को नजरअंदाज कर रहे लोग सहायक नदियों को बचाये बिना निर्मल गंगा का सपना अधूरा नदियों में सरकारी स्वच्छता अभियान की उड़ रही धज्जियां दुर्गावती. स्थानीय मुख्यालय बाजार के निकट से गुजरने वाली जीवनदायिनी दुर्गावती नदी को दूषित करने में अब लोगों की लापरवाही साफ झलक रही है. पहले जहां पूजन सामग्री और फूल-पत्तियां इस नदी में डाले जाते थे, वहीं अब इस नदी में प्लास्टिक युक्त कचरा फेंकने से भी लोग परहेज नहीं कर रहे हैं. जबकि, सरकार द्वारा शहर-बाजार से लेकर पंचायत स्तर पर भी चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान के तहत कचड़ा प्रबंधन की कवायद शुरू है. इसके तहत डस्टबिन के अलावा कचरा घर भी बनाये जा रहे हैं. इतना ही नहीं कचरे को खुले में फेंकना प्रतिबंधित भी माना जाता है. ऐसे में इस नदी तट पर कचरा फेंकने वालों को भला कौन समझाये. इन हालातों से लगता है कि नदियों को स्वच्छ रखने की कवायद कागजों तक ही सीमित रह गयी है. # नदियों की स्वच्छता पर लग रहा ग्रहण नदिया जीवित प्राणियों को प्रकृति द्वारा दिये गये अनमोल उपहारों में से एक है. क्षेत्र से गुजरने वाली कर्मनाशा और दुर्गावती नदी जो गंगा बेसिन में विलुप्त होती छोटी नदियां हैं, लेकिन इन नदियों में फेंके जा रहे कचरे से जल की स्वच्छता बनाये रखने पर भी ग्रहण लगता दिख रहा है. जानकारी के अनुसार, इन नदियों के किनारे फेंके जा रहे प्लास्टिक युक्त कचरे से इन नदियों में प्रदूषण का खतरा काफी बढ़ गया है. इतना ही नहीं गंगा को हम तब तक अविरल और निर्मल नहीं बना सकते, जब तक गंगा में मिलने वाली ऐसी सहायक नदियों के संरक्षण के दिशा में प्रयास नहीं किया जाता. इधर, आमजनों के बीच भी इन नदियों में प्रदूषण चर्चा का विषय बना हुआ है. # कैसे एक-दूसरे से मिलती हैं नदियां गौरतलब है कि दुर्गावती नदी रामगढ़ प्रखंड के आटडीह गांव के निकट से गुजरती कर्मनाशा नदी में मिलती है और कर्मनाशा नदी दुर्गावती नदी के जलधारा को समेटते हुए चौसा-बक्सर के निकट गंगा में मिल जाती है. # कर्मनाशा नदी को मिला है राष्ट्रीय जलमार्ग 54 का दर्जा बताया जाता है कि कर्मनाशा नदी को पतन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय जलमार्ग 54 के रूप में दर्जा प्राप्त है. यह नदी लगभग 86 किलोमीटर की दूरी में यूपी बिहार को विभाजित करती है. इतना ही नहीं भारत के संरक्षण और कायाकल्प हेतु गंगा और उसकी सहायक नदियों के लिए नमामि गंगे कि केंद्रीय क्षेत्र योजना और अन्य नदियों के लिए राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना एनआरसीपी बनायी गयी है. अब ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जबतक गंगा में मिलने वाली सहायक नदियों को स्वच्छ नहीं रख सकते, तब तक गंगा कि जलधारा को दूषित होने से कैसे बचा सकते हैं. बताते चले कि दुर्गावती बाजार के निकट से गुजरने वाली दुर्गावती नदी के दोनों किनारे पर कूड़े -कचरे का ढेर देखा जा रहा है, तो कमोबेश यही हाल क्षेत्र के खजुरा बाजार के निकट से गुजरने वाली कर्मनाशा नदी का है. जहां दोनों किनारों पर कचरे का अंबार लगा है. वहीं, कर्मनाशा नदी यूपी-बिहार सीमा को विभाजित करती दुर्गावती नदी की जलधारा को समेटते हुए गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में से यह भी एक प्रमुख नदी मानी जाती है. # संरक्षण व जीर्णोद्धार के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र इलाके के पचिलखी गांव निवासी सह कैमूर विकास मंच के अध्यक्ष सुधांशु श्रीवास्तव द्वारा कर्मनाशा व दुर्गावती नदी के संरक्षण व जीर्णोद्धार को लेकर मंत्री जल शक्ति मंत्रालय (जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग भारत सरकार के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय बिहार ( पटना) को राज्य स्तरीय करवाई हेतु 16 मार्च 2023 को भेजे गये पत्र के माध्यम से इन नदियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया है. भेजे गये पत्र में कहा गया है कि कैमूर जिले की प्रमुख नदियों में शामिल कर्मनाशा और दुर्गावती नदी जो गंगा बेसिन में विलुप्त होती छोटी नदियां हैं. जबकि, कर्मनाशा नदी को पतन, पोत परिवहन और जल मार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय जलमार्ग 54 के रूप में दर्जा प्राप्त है. नदियों के संरक्षण और कायाकल्प हेतु गंगा और उसकी सहायक नदियों के लिए नमामि गंगे केंद्रीय क्षेत्र योजना और उसकी सहायक नदियों के लिए राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना एनआरसीपी बनायी गयी है. जबकि, पिछले तीन दशकों में बारहमासी नदियां अब रुक रुक कर बहने वाली मौसमी नदियां बन गयी है. गंगा को हम तब तक अविरल और निर्मल नहीं बना सकते हैं, जब तक इसकी सहायक नदियों के संरक्षण के लिए भी कोई मुहिम नहीं चलायी जाती. कहते हैं क्षेत्रवासी – क्षेत्रवासियों में शामिल हंसराज भारती कहते हैं कि दुर्गावती नदी बरसाती नदी बनकर रह गयी है. नदियों में फेंके जा रहे कचरे से नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है. – ग्रामीण जगत नारायण राम कहते है कि पहले लोग नदियों का जल प्यास लगने पर पी लेते थे. लेकिन अब नदियों में फेंके जा रहे कचरे को देखते हुए लोग इसके पानी को पीने से कतराते हैं. नदियों की साफ सफाई, जीर्णोद्धार व भूजल स्तर घटे नहीं, इसके लिए नदियों में छोटे-छोटे छलके के निर्माण की ओर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए. – ग्रामीण रामाशंकर यादव की कहते है कि प्रकृति ने नदियों को जीवनदायिनी के रूप में दिया है. लोगो को नदियों में कचरा नहीं फेंकना चाहिए.
नदी किनारे फेंका जा रहा कचरा, संकट में जल-जीवन व पर्यावरण
दुर्गावती व कर्मनाशा नदियों को स्वच्छ रखने की कवायद कागजों तक ही सीमित
