Kaimur News : चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों के रसोई बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है. कैमूर जिले के बाजार में कुछ दिन पहले तक 45 से 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गयी है. महज कुछ दिनों में करीब 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गयी है.
चीनी महंगी हुई तो चाय और मिठाई पर भी पड़ेगा असर
चीनी के दाम बढ़ने का सीधा असर चाय, मिठाई और दूसरे खाद्य पदार्थों की लागत पर पड़ रहा है. दुकानदारों का कहना है कि चीनी महंगी होने से चाय और मिठाई तैयार करने का खर्च बढ़ गया है. आने वाले दिनों में इसका असर तैयार खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
रक्षाबंधन पर मिठाई के दाम बढ़ने की आशंका
रक्षाबंधन को लेकर मिठाई दुकानदारों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. दुकानदारों के अनुसार, चीनी सहित कच्चे माल की कीमत बढ़ने से इस बार मिठाइयों के दाम में भी उछाल आ सकता है. इसका सीधा असर त्योहार पर मिठाई खरीदने वाले ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा.
जरूरत भर की चीनी खरीद रहे ग्राहक
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कीमत बढ़ने के बाद ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हुई है. पहले लोग घरेलू जरूरत के हिसाब से अधिक मात्रा में चीनी खरीद लेते थे, लेकिन अब महंगाई के कारण लोग जरूरत भर की ही खरीदारी कर रहे हैं. इसका असर छोटे दुकानदारों और मिठाई कारोबारियों पर भी पड़ने की आशंका है.
पूजा और शादी जैसे आयोजनों पर भी बढ़ेगा खर्च
लोगों का कहना है कि चीनी की जरूरत केवल चाय और खाने-पीने तक सीमित नहीं है. पूजा-पाठ, शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन, त्योहार और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में भी इसकी खपत होती है. ऐसे में अचानक कीमत बढ़ने से मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है.
जमाखोरी और कालाबाजारी की जांच की मांग
उपभोक्ताओं ने प्रशासन से बाजार में चीनी की कीमतों की जांच कराने और जमाखोरी व कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है तो खुदरा कीमत में अचानक इतनी बड़ी बढ़ोतरी की जांच होनी चाहिए.
महंगाई से गरीब परिवार सबसे ज्यादा परेशान
स्थानीय लोगों के अनुसार, सीमित आमदनी वाले परिवारों पर महंगाई का सबसे अधिक असर पड़ता है. रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च पहले ही मुश्किल से पूरा हो रहा है. ऐसे में चीनी जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले खाद्य पदार्थ की कीमत बढ़ने से घरेलू बजट और बिगड़ गया है.
