रामगढ़ पीएम श्री विद्यालय में शिक्षकों और कक्षाओं की भारी कमी, पढ़ाई प्रभावित

#आखिर कैसे बनेगा रामगढ़ का दोनों ‘पीएम श्री स्कूल’ शिक्षा का मॉडल?

#आखिर कैसे बनेगा रामगढ़ का दोनों ‘पीएम श्री स्कूल’ शिक्षा का मॉडल? #आदर्श बालिका प्लस टू विद्यालय में 2500 छात्राओं पर गिने-चुने शिक्षक #पीएम श्री प्लस टू रामगढ़ में छह से 12 तक की कक्षा में एक भी साइंस के शिक्षक नहीं रामगढ़. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री योजना के तहत चयनित रामगढ़ बाजार के दो पीएम श्री आदर्श बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय व पीएम श्री प्लस टू उच्च विद्यालय रामगढ़ दोनों विद्यालय बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे है. आदर्श बालिका में 2500 छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन शिक्षकों और कक्षाओं की भारी कमी ने पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. जिस विद्यालय को आधुनिक शिक्षा, बेहतर संसाधन और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का मॉडल बनना था, वहां छात्राएं भीड़ भाड़ वाले कमरों और सीमित शिक्षकों के सहारे पढ़ने को मजबूर हैं. स्थिति यह है कि कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई के लिए मात्र दो शिक्षक उपलब्ध हैं. इनमें एक उर्दू और एक अंग्रेजी विषय के शिक्षक हैं. नये सत्र में कक्षा छह में लगभग 150 छात्राओं का नामांकन हुआ है, लेकिन उनके लिए सिर्फ एक कमरा है. वहीं, कक्षा आठ के एक सेक्शन में करीब 165 छात्राएं बैठती हैं. ऐसे में छात्राओं की उपस्थिति दर्ज करना और अनुशासन बनाये रखना ही शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई तो दूर की बात. कक्षा नौ और 10 की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है, यहां एक-एक सेक्शन में 100 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं. कमरे कम हैं और विषयवार शिक्षक भी पर्याप्त नहीं हैं. कई बार छात्राओं को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है. अभिभावकों का कहना है कि सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और गुणवत्ता सुधार की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिक्षक पदस्थापन में इतना असंतुलन क्यों है? रामगढ़ प्रखंड के ही अकौढ़ी, कलानी, बंदीपुर और नोनार जैसे विद्यालयों में छात्र संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद शिक्षकों की संख्या अधिक है. अकौढ़ी विद्यालय में लगभग 500 छात्रों पर 22 से अधिक शिक्षक कार्यरत बताये जा रहे हैं, जबकि धरातल पर पीएम श्री स्कूल जैसी बड़ी संस्था शिक्षक संकट से जूझ रही है. इतना ही विद्यालय में शिक्षकों की घोर कमी को लेकर विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार सिंह द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को कई बार लिखित व मौखिक रूप से बोला जा चुका है, हास्यास्पद यह कि सालों बीत जाने के बाद भी मुख्यालय के विद्यालय पर जिला शिक्षा पदाधिकारी की नजर क्यों नहीं जाती, यह अभिभावकों के बीच यक्ष प्रश्न बने है. अभिभावकों ने जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी से नये शैक्षणिक सत्र में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो हजारों छात्राओं का भविष्य प्रभावित होगा और पीएम श्री योजना का उद्देश्य सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह जायेगा. हजार छात्रों की पढ़ाई के लिए साइंस के शिक्षक नहीं वहीं, दूसरी तरफ मुख्यालय स्थित पीएम श्री प्लस टू उच्च विद्यालय रामगढ़ में पिछले तीन वर्षों से प्लस टू के छात्र साइंस के शिक्षक के बिना पढ़ाई करने को मजबूर है. वर्ग छह से प्लस टू 12 तक के चलने वाले इस विद्यालय में लगभग एक हजार छात्रों की पढ़ाई साइंस के शिक्षक के बगैर चलने को मजबूर है. एक वर्ष पहले विद्यालय को पीएम श्री का दर्जा मिलने के बाद वर्ग छह से आठ तक की पढ़ाई के लिए नामांकित 314 छात्रों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है, ऐसे में उक्त वर्ग के बच्चों को प्लस टू के शिक्षक पढ़ाने को मजबूर है. जानकारी के अनुसार, दो वर्षों पूर्व दसवीं कक्षा तक साइंस पढ़ाने वाले एक शिक्षक जबकि कुछ दिनों पहले एक दूसरे शिक्षक का स्थानांतरण होने के बाद विद्यालय साइंस शिक्षक विहीन है. धरातल पर नजर डालें तो विद्यालय के बच्चों को पठन-पाठन के लिए कुल 26 शिक्षक विद्यालय के 17 सुसज्जित कमरों में पढ़ाई कराते हैं. प्लस टू के तीन संकाय की होने वाली पढ़ाई में आर्ट में कला, म्यूजिक के साथ साइक्लॉजी व पॉलिटिकल साइंस के एक भी शिक्षक नहीं व कॉमर्स फैकल्टी में बिजनेस स्टडी, इपीएस के एक भी शिक्षक नहीं है. ऐसे में पीएम श्री का दर्जा प्राप्त इन दोनों विद्यालयों में पहुंचने वाले बच्चों की तालीम कैसे पूरी हो यह अभिभावकों के बीच यक्ष प्रश्न बने हुए है.

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By Vikash kumar

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