Ramgarh Garbage Disposal Issue : कैमूर जिले के रामगढ़ नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था पर हर महीने करीब 16 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कूड़ा निस्तारण केंद्र नहीं होने के कारण वार्डों से उठाया गया कचरा अब रामगढ़-देवहलिया मुख्य सड़क के किनारे फेंका जा रहा है. सड़क किनारे पड़े कूड़े से उठ रही दुर्गंध और जलाए जा रहे कचरे के धुएं से राहगीरों और आसपास के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है.
Kaimur News : मुख्य सड़क बनी कूड़ा डंपिंग स्थल
नगर पंचायत के 13 वार्डों से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे को ट्रैक्टर के जरिए मुख्य सड़क किनारे डंप किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिनदहाड़े सड़क पर कूड़ा गिराया जा रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए न तो नगर पंचायत प्रशासन गंभीर है और न ही जनप्रतिनिधि.
महादलित बस्ती पर भी मंडरा रहा खतरा
जहां कूड़ा डंप किया जा रहा है, वहां से करीब 200 मीटर की दूरी पर महादलित बस्ती स्थित है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कूड़े से फैलने वाली दुर्गंध, धुआं और संक्रमण कभी भी बस्ती के लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है. इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है.
चार साल बाद भी नहीं बना कूड़ा निस्तारण केंद्र
रामगढ़ को नगर पंचायत का दर्जा मिले चार वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अब तक कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण नहीं हो सका है. दो वर्ष पहले नगर पंचायत के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी राहुल कुमार ने बताया था कि भूमि चिह्नित कर अंचल कार्यालय से एनओसी मिलने के बाद निस्तारण केंद्र बनाया जाएगा. हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.
स्वच्छ भारत मिशन के दावों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नगर पंचायत ही नहीं, बल्कि प्रखंड की 12 पंचायतों में भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई और कूड़ा प्रबंधन पर हर महीने राशि खर्च होने के बावजूद कचरा सड़कों के किनारे ही फेंका जा रहा है. इससे सरकार की स्वच्छता योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्रवासियों ने नगर पंचायत और जिला प्रशासन से जल्द कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण कराने, सड़क किनारे कचरा फेंकने पर रोक लगाने और नियमित वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
