निरीक्षण में विद्यालय बंद मिलने पर प्रधानाध्यापक निलंबित
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KAIMUR NEWS.बिना सूचना के विद्यालय से अनुपस्थित रहने और कार्य दिवस के दिन भी विद्यालय बंद रखने के मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) शंभू कुमार सिंह ने कार्रवाई करते हुए अधौरा प्रखंड के कोलहुआ विद्यालय के प्रधानाध्यापक हंसराज सक्सेना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
डीपीओ स्थापना की बड़ी कार्रवाई, 28 मार्च को बीइओ ने कोलहुआ विद्यालय किया था निरीक्षण
बीइओ के जांच के दौरान विद्यालय में लटका मिला था ताला
स्पष्टीकरण का जवाब सही नहीं मिलने पर हुई निलंबन की कार्रवाई
भभुआ ग्रामीण.
बिना सूचना के विद्यालय से अनुपस्थित रहने और कार्य दिवस के दिन भी विद्यालय बंद रखने के मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) शंभू कुमार सिंह ने कार्रवाई करते हुए अधौरा प्रखंड के कोलहुआ विद्यालय के प्रधानाध्यापक हंसराज सक्सेना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. साथ ही प्रपत्र ‘क’ गठित करने का आदेश जारी किया गया है.जारी आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान प्रधानाध्यापक को नियमानुसार निर्वाह भत्ता दिया जायेगा. दरअसल, बीते 28 मार्च को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया था. निरीक्षण के दौरान विद्यालय पूरी तरह बंद मिला और मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ था. जांच के दौरान किसी भी शिक्षक या कर्मी की उपस्थिति नहीं पायी गयी, जिससे विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया. इस घटना को संज्ञान में लेते हुए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने संबंधित प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उनका जवाब विभाग को संतोषजनक नहीं लगा. इसके बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा. पत्र के आलोक में डीपीओ स्थापना शंभू कुमार सिंह ने त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान हंसराज सक्सेना को चरवाहा प्राथमिक विद्यालय, अधौरा में योगदान करना होगा. साथ ही उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता भी प्रदान किया जायेगा. आगे की विभागीय कार्रवाई के लिए प्रपत्र ‘क’ भी गठित किया जायेगा.
निगरानी के बावजूद नहीं सुधर रही व्यवस्था
गौरतलब है कि विभाग स्तर पर लगातार विद्यालयों की निगरानी की जा रही है, फिर भी जिले के पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है. कई स्थानों पर विद्यालय कार्य दिवस के दौरान भी बंद मिल रहे हैं, जबकि कुछ विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक होने के बावजूद केवल एक या दो शिक्षकों के सहारे संचालन किया जा रहा है.यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है. अधिकारियों के निरीक्षण में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि अनुशासन और जवाबदेही की कमी अब भी बनी हुई है.यदि समय रहते सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाये गये, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ेगा. विभाग को चाहिए कि निगरानी के साथ-साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित करे, ताकि विद्यालयों में नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य संचालित हो सके.
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