शादी-विवाह के सीजन में डीजे के कानफोड़ू शोर से लोग परेशान

रात 10 बजे बाद भी बज रहे शहर में डीजे की धुन पर प्रशासन भी मेहरबान

= रात 10 बजे बाद भी बज रहे शहर में डीजे की धुन पर प्रशासन भी मेहरबान = मैरिज हॉल, लॉन, धर्मशाला में बजाये जा रहे कानफोड़ू डीजे पर कार्रवाई की मांग भभुआ सदर. शादी-विवाह के इस व्यस्त सीजन में इन दिनों शहरवासी सहित आसपास ग्रामीण इलाकों के लोग डीजे की तेज आवाज से बेहद परेशान हैं. आये दिन देर रात तक शहर स्थित मैरिज हॉल, लॉन, धर्मशाला आदि में बजाये जा रहे कानफोड़ू डीजे पर संगीत से हर तबका परेशान है. सबसे खराब स्थिति तो बड़े बुजुर्गों की है, जो तेज आवाज से बजाये जा रहे डीजे के चलते परेशानी झेलने को मजबूर हो रहे हैं. दरअसल, शादी विवाह के दौरान बजने वाले एक डीजे में लगभग चार से दस साउंड सिस्टम होते हैं. इससे हजारों डेसीबल शोर निकलता है, जो लोगों को चिड़चिड़ा बना देता है. विशेषकर शहर में मैरिज हॉल, वाटिका, लॉन सामुदायिक भवन के आसपास रहने वाले लोग तेज आवाज में बजते इन डीजे के कारण खासे परेशान हैं. उनका कहना है कि न्यायालय ने रात दस बजे तक ही लाउडस्पीकर आदि बजाने के आदेश दे रखे हैं, लेकिन जांच कर कार्रवाई नहीं होने से प्रतिबंधित डीजे पर बजते कानफोड़ू संगीत से मनमानी चरम पर है. = बुजुर्गों के साथ बच्चों के अभिभावक भी शोर से चिंतित इधर, तेज डीजे के शोर से बुजुर्ग लोगों के साथ बच्चों के परिजन भी काफी परेशान है. उनका मानना है कि शोर के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो जा रही है. शहरवासियों ने बताया कि डीजे के चलते बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं. शाम होते ही डीजे की आवाजें आनी शुरू हो जाती हैं. अब तेज आवाज और शोर के चलते शाम के समय पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं. = एक वर्ष की कैद या पांच लाख जुर्माना का प्रावधान गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी तेज कानफोड़ू संगीत को बजाने में रोक लगा रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने रात 10 से सुबह 6 बजे तक ध्वनि प्रदूषण पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा रखा है. साथ ही कोर्ट में पांच लाख रुपये तक का जुर्माना व दोषी होने पर एक वर्ष कैद की सजा का प्रावधान है. लेकिन, शहर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश व फरमान का असर दिखायी नही दे रहा है. कुछ महीने पहले अनुमंडल प्रशासन द्वारा शहर के मैरिज हॉल व लॉन संचालकों के साथ बैठक कर इस पर सख्ती से रोक लगाने का निर्देश दिया था लेकिन अनुमंडल प्रशासन के निर्देशों का शहर में अमल होता नहीं दिख रहा है.

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Author: VIKASH KUMAR

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