कैमूर: रामगढ़ के आदर्श बालिका स्कूल से 9 शिक्षक हटे तो भड़के अभिभावक: 2400 छात्राओं की पढ़ाई पर संकट, सांसद सुधाकर सिंह ने दी आंदोलन की चेतावनी

कैमूर के रामगढ़ में आदर्श बालिका विद्यालय से 9 निजी शिक्षकों को हटाए जाने से 2400 छात्राओं की पढ़ाई खतरे में पड़ गई है. नाराज अभिभावकों ने शिक्षकों की स्थायी तैनाती की मांग की है, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी है.

Kaimur News: जिले के रामगढ़ स्थित आदर्श बालिका प्लस टू विद्यालय में ‘गार्जियन गवर्नमेंट’ (अभिभावक सहभागिता) मॉडल के तहत पढ़ा रहे नौ निजी शिक्षकों को शिक्षा विभाग द्वारा हटाए जाने के बाद छात्राओं की पढ़ाई पर गहरा संकट मंडराने लगा है. इस निर्णय से नाराज विद्यालय प्रबंध समिति और अभिभावकों ने शुक्रवार को एक आपात बैठक की, जिसकी अध्यक्षता विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष सह बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने की. बैठक में अभिभावकों ने दो-टूक कहा कि अगर एक महीने के भीतर विषयवार शिक्षकों की स्थायी तैनाती नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे.

2400 छात्राओं के लिए केवल 29 शिक्षक, 43 की जगह चल रहे 22 सेक्शन

सांसद सुधाकर सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि रामगढ़ के लोगों ने हमेशा आत्मनिर्भर शिक्षा मॉडल को अपनाया है. प्रखंड के करीब 20 विद्यालयों में अभिभावक खुद अपनी जेब से प्रति माह अतिरिक्त अंशदान देकर शिक्षकों की व्यवस्था करते रहे हैं, ताकि बेटियों की पढ़ाई न रुके. उन्होंने मौजूदा स्थिति के आंकड़े सामने रखते हुए कहा:

  • शिक्षकों की भारी कमी: विद्यालय में कुल 2400 छात्राएं नामांकित हैं, जबकि सरकारी शिक्षक महज 29 हैं (जिनमें दो कंप्यूटर, दो उर्दू, तीन कॉमर्स, दो दिव्यांग शिक्षक और एक प्रधानाध्यापक शामिल हैं). विद्यालय को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम 70 शिक्षकों की आवश्यकता है.
  • कमरों का घोर अभाव: सरकारी मानकों के मुताबिक यहां 43 सेक्शन होने चाहिए, लेकिन कमरे केवल 30 होने के कारण महज 22 सेक्शन ही चल पा रहे हैं. मानक के अनुसार कम से कम 70 कमरों की दरकार है.
  • अभिभावकों का योगदान: विद्यालय में बेटियों को तकनीकी शिक्षा देने के लिए अभिभावकों के पैसे से 22 कंप्यूटर लगाए गए थे, जबकि सरकार ने हाल ही में सिर्फ आठ कंप्यूटर भेजे हैं. दूर-दराज के गांवों से छात्राओं को लाने-ले जाने वाली बस सेवा भी अभिभावकों के सहयोग से ही संचालित होती है.
सभा को सम्बोधित करते सांसद सुधाकर सिंह

बीईओ पर एमडीएम में वसूली का आरोप, शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

सांसद ने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार गरीबों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है. उन्होंने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) पर मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना में प्रति विद्यालय अवैध वसूली तय करने का सीधा आरोप लगाया. सांसद ने कहा कि उच्च शिक्षा की स्थिति भी बदहाल है; क्षेत्र में महिला व पुरुष दोनों डिग्री कॉलेज होने के बावजूद छात्राओं का नामांकन 50 किलोमीटर दूर के कॉलेजों में कर दिया जाता है. इस संबंध में वे पहले भी राज्यपाल से मिलकर व्यवस्था सुधारने की मांग कर चुके हैं.

जगदानंद सिंह के संघर्ष की देन है यह विद्यालय

बैठक में जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विनीत सिंह उर्फ बंटी, प्रबंध समिति सदस्य ललन प्रसाद, अभिभावक रामाकांत सिंह, बलिराम सिंह और लोरिक यादव ने विद्यालय के ऐतिहासिक योगदान को याद किया. वक्ताओं ने बताया कि 1980 के दशक में पूर्व मंत्री जगदानंद सिंह ने अभिभावकों के साथ मिलकर बांस-बल्ली और फूस की झोपड़ी से इस संस्थान की नींव रखी थी. आज यहां से पढ़कर निकली बेटियां देश के सर्वोच्च पदों पर सेवा दे रही हैं. बैठक के अंत में विद्यालय की छात्राओं ने सीधे सांसद से मिलकर शिक्षकों के हटने से बाधित हो रही पढ़ाई की समस्या रखी, जिस पर उन्होंने शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया. कार्यक्रम का संचालन प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह ने किया.

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By संजय जायसवाल

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