कैमूर : नुआंव के स्कूल में 361 बच्चे गर्मी में बिना पंखे, पानी की टंकी से व्यर्थ बह रहा पानी, व्यवस्था पर सवाल

नुआंव के सरकारी स्कूल में 361 बच्चे भीषण गर्मी में बिना पंखे के पढ़ने को मजबूर हैं। पानी की टंकियों में टोटियां न होने से पानी सरोवर में व्यर्थ बह रहा है।

सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं देने के लिए हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. लेकिन नुआंव प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय तरैथा में व्यवस्था की तस्वीर इससे अलग नजर आ रही है. शनिवार दोपहर 361 बच्चे भीषण गर्मी के बीच बिना पंखे के कक्षाओं में पढ़ते मिले. वहीं, पानी की टंकी से निकल रहा पानी चार टोटियों के अभाव में विद्यालय के पीछे स्थित सरोवर में व्यर्थ बहता रहा.

चार माह से बंद हैं स्कूल के पंखे

विद्यालय के दो कमरों में लगे पंखे करीब चार माह से बंद हैं. पंखों के टूटे हिस्से छत से लटक रहे हैं. इन कमरों में सैकड़ों बच्चों को गर्मी के बीच शिक्षक पढ़ाने को मजबूर हैं. वहीं, बच्चों के क्लासरूम से सटे विद्यालय कार्यालय में पंखा चलता मिला. इससे स्कूल की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

चार टोटियां लग जाएं तो बच्चों को मिलेगा पानी

विद्यालय में बच्चों, शिक्षकों और मध्याह्न भोजन के लिए दो समरसेबल पंप, पानी की टंकियां और एक चापाकल मौजूद हैं. एक समरसेबल पंप का मोटर लंबे समय से खराब है, जबकि उससे जुड़ी दोनों पानी की टंकियां टूटकर स्टोर रूम में पड़ी हैं. दूसरा समरसेबल चालू है, लेकिन टंकी में चार टोटियां नहीं लगी होने के कारण पानी बच्चों के इस्तेमाल में आने के बजाय ओवरफ्लो होकर सीधे सरोवर में गिर रहा है.

टूटे पंखे के नीचे बच्चों को ज्ञान देते  शिक्षक

चापाकल के सहारे बच्चों की प्यास

स्थानीय स्तर पर मामूली खर्च में लगने वाली टोटियां नहीं होने के कारण स्कूल में उपलब्ध पानी की सुविधा बच्चों के काम नहीं आ रही है. फिलहाल बच्चों को चापाकल के सहारे अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है. छात्रों के अनुसार कुछ माह पहले भू-गर्भ जलस्तर नीचे जाने के कारण चापाकल ने भी पानी देना बंद कर दिया था. उस समय बच्चों को पानी के लिए घर जाना पड़ता था.

361 बच्चों पर 11 शिक्षक और नौ कमरे

उत्क्रमित मध्य विद्यालय तरैथा में कक्षा एक से आठ तक कुल 361 बच्चे नामांकित हैं. इनके पठन-पाठन के लिए 11 शिक्षक और नौ कमरे हैं. इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बीच गर्मी में पंखों का बंद रहना उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय है.

खेल सामग्री भी पर्याप्त नहीं होने की शिकायत

कक्षा आठ के छात्र रौशन प्रताप सिंह ने बताया कि विद्यालय में खेल सामग्री भी पर्याप्त नहीं है. गेंद और गोला फेंकने की सामग्री समेत कई जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. छात्र ने बताया कि बैट तो मिला है, लेकिन बॉल नहीं है. गर्मी में पंखे के बिना कक्षा में बैठना पड़ता है और पानी के लिए चापाकल ही सहारा है.

विकास मद में मिलते हैं 75 हजार रुपये

विद्यालयों में विकास कार्यों के लिए बच्चों की संख्या के आधार पर राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान है. 150 से अधिक बच्चों वाले विद्यालय को विकास मद में 75 हजार रुपये तक दिए जाने की बात बतायी गयी है. इस राशि से रंग-रोगन, डेस्क-बेंच की मरम्मत, पंखे, वायरिंग, रजिस्टर सहित अन्य जरूरी कार्य कराये जाते हैं. ऐसे में 361 बच्चों वाले विद्यालय में पेयजल के लिए टोटियां नहीं लगना और महीनों से खराब पंखों की मरम्मत नहीं होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

प्रभारी प्रधानाध्यापिका ने बतायी यह वजह

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका सीता देवी ने बताया कि करीब चार माह पहले प्रखंड स्तर पर चार दिनों की ट्रेनिंग के लिए जाने के दौरान क्लासरूम में लगे कुछ पंखे तोड़ दिये गये थे. इसकी सूचना वरीय पदाधिकारियों को दी गयी थी. उन्होंने बताया कि उन्हें 7 जुलाई 2025 से प्रधानाध्यापिका का प्रभार मिला है. वर्ष 2025 में मिली विकास मद की राशि रंग-रोगन, पंखे, कुर्सी, वायरिंग और अन्य सामान पर खर्च हो चुकी है. फिलहाल राशि उपलब्ध नहीं है. राशि मिलने पर पंखे और टोटियां लगवायी जाएंगी.

टूटे पंखे के नीचे बच्चों को ज्ञान देते  शिक्षक

बीईओ ने जांच कर व्यवस्था सुधारने का दिया भरोसा

प्रभारी बीईओ मुन्ना कुमार ने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों के बीच दो गुट होने की जानकारी मिली है. प्रधानाध्यापिका के ट्रेनिंग के दौरान क्लासरूम में पंखे तोड़े जाने की सूचना पर आठ शिक्षकों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था. उन्होंने कहा कि यदि टोटियों के अभाव में बच्चों को पानी नहीं मिल रहा है तो यह गंभीर मामला है. वे स्वयं विद्यालय पहुंचकर जांच करेंगे और तीन-चार दिनों में व्यवस्था दुरुस्त कराने का प्रयास करेंगे.

361 बच्चों की सुविधाओं पर अब विभाग की नजर

तरैथा विद्यालय की स्थिति को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बच्चों की सुविधाओं के लिए सरकारी स्तर पर राशि और संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे हैं, तो पंखों की मरम्मत और कुछ टोटियां लगाने जैसी छोटी जरूरतें महीनों से क्यों लंबित हैं. बीईओ के जांच के भरोसे के बाद अब देखना होगा कि विद्यालय की पेयजल और गर्मी से जुड़ी समस्याओं का समाधान कब तक होता है.

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By संजय जायसवाल

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