कैमूर में आजादी के 8 दशक बाद भी सड़क का इंतजार, खर्राटी खुर्द में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, भूख हड़ताल का ऐलान

कैमूर जिले के खर्राटी खुर्द गांव में आजादी के आठ दशक बीत जाने के बाद भी पक्की सड़क न बनने से ग्रामीण आक्रोशित हैं. उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान किया है. सरकारी दावों पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि बच्चे भी कीचड़ भरी सड़क पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं.

Kaimur News: कैमूर जिले के चांद प्रखंड अंतर्गत खर्राटी खुर्द गांव में आजादी के आठ दशक बीत जाने के बाद भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों का सब्र टूट गया है. वर्षों से बुनियादी सड़क सुविधा की गुहार लगा रहे ग्रामीणों का आक्रोश अब आर-पार के आंदोलन में तब्दील हो चुका है. ग्रामीणों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान करते हुए जर्जर सड़क किनारे ही धरना स्थल और टेंट तैयार कर लिया है.

गांव की बदहाल, कीचड़ से पटी और जगह-जगह कटी हुई सड़क की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे विकास के सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

सोशल मीडिया पर बच्चों का वीडियो वायरल, लिखा— "मंत्री जी, आपको आना पड़ेगा"

ग्रामीणों ने अपनी उपेक्षा की आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है. एक वायरल वीडियो में मासूम बच्चे हाथों में किताबें लेकर कीचड़ व गड्ढों से भरी टूटी सड़क पर खड़े नजर आ रहे हैं. वीडियो में स्लोगन लिखा गया है— "मंत्री जी, आपको आना पड़ेगा, ग्रामीणों की समस्या सुनना पड़ेगा." ग्रामीणों ने स्थानीय मंत्री मोहम्मद जमा खान और मुख्यमंत्री को टैग करते हुए गांव की बदहाली से रूबरू होने की सार्वजनिक अपील की है.

मंत्री, सांसद और डीएम तक लगाई गुहार, पर नहीं निकला हल

ग्रामीण हीरामन यादव समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे सड़क निर्माण की मांग को लेकर स्थानीय विधायक, मंत्री, सांसद और जिलाधिकारी (DM) तक दर्जनों बार लिखित आवेदन और पत्राचार कर चुके हैं. जनप्रतिनिधि चुनाव के समय पक्की सड़क का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही समस्याओं को बिसरा दिया जाता है. बरसात के दिनों में सड़क कई स्थानों पर कट जाती है, जिससे गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है. दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी यह मार्ग फिसलन और गड्ढों के कारण जानलेवा साबित हो रहा है.

कच्ची सड़क पर पानी में प्रवेश कर विरोध जताते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network

मरीज, बुजुर्ग और स्कूली बच्चे सबसे अधिक बेहाल

सड़क न होने का सबसे बड़ा खामियाजा स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है. बारिश में दलदल बने रास्ते से होकर रोज स्कूल जाना छात्र-छात्राओं के लिए जोखिम भरा बन गया है. आपात स्थिति में एंबुलेंस या चार पहिया वाहन गांव में नहीं पहुंच पाते, जिससे बीमार व्यक्तियों और प्रसूताओं को खाट या पैदल लेकर अस्पताल जाना पड़ता है.

'ठोस आश्वासन मिलने तक जारी रहेगी भूख हड़ताल': ग्रामीण

ग्रामीणों ने दो टूक स्पष्ट किया है कि सड़क किनारे लगाए गए टेंट में गुरुवार से शुरू होने वाली भूख हड़ताल किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि गांव के बुनियादी अधिकार के लिए है. जब तक प्रशासन व सरकार की ओर से सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस प्रशासनिक पहल और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक यह अनशन और आंदोलन निरंतर जारी रहेगा.

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By Sunil kr pathak

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