Kaimur News : कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड स्थित लोहंदी करर मध्य विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था अब भी सामान्य नहीं हो सकी है. बुधवार को लगातार 18वें दिन भी विद्यालय में एक भी छात्र-छात्रा पढ़ाई के लिए नहीं पहुंचा. भूत-प्रेत की अफवाह के कारण गांव में फैला डर अब भी बरकरार है. जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के लगातार प्रयासों के बावजूद अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं. इससे विद्यालय में नामांकित 85 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है.
मनोचिकित्सक ने बताया- यह केवल मनोवैज्ञानिक प्रभाव
जिला प्रशासन की पहल पर मनोचिकित्सक डॉ. भावना गुप्ता अपनी टीम के साथ विद्यालय पहुंचीं. उन्होंने विद्यालय परिसर और गांव में महिलाओं, पुरुषों तथा अभिभावकों के बीच जागरूकता अभियान चलाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय में किसी प्रकार की भूत-प्रेत जैसी घटना नहीं है, बल्कि यह अफवाह और मनोवैज्ञानिक प्रभाव का परिणाम है. उन्होंने लोगों से वैज्ञानिक सोच अपनाने और बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने की अपील की.
बच्चों की काउंसिलिंग का दिया भरोसा, फिर भी नहीं माने अभिभावक
डॉ. भावना गुप्ता ने कहा कि चिकित्सकों की टीम विद्यालय के संपर्क में रहेगी और जरूरत पड़ने पर बच्चों की काउंसिलिंग भी की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा. इसके बावजूद अधिकांश अभिभावक अपने निर्णय पर अड़े रहे और बच्चों को विद्यालय भेजने से इनकार कर दिया.
खेल गतिविधियां बढ़ाने की सलाह, लेकिन स्कूल में नहीं मिली पर्याप्त खेल सामग्री
मनोचिकित्सक ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के साथ बैठक कर फिलहाल बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम रखने तथा कबड्डी, वॉलीबॉल, क्रिकेट जैसे सामूहिक खेलों को बढ़ावा देने की सलाह दी. उनका कहना था कि खेल बच्चों के मन से भय दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है. हालांकि निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि विद्यालय में पर्याप्त खेल सामग्री उपलब्ध नहीं है, जबकि समग्र शिक्षा अभियान के तहत इसके लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है.
तीन छात्राओं के बेहोश होने के बाद फैली थी अफवाह
करीब 18 दिन पहले विद्यालय में एक साथ तीन छात्राएं बेहोश हो गई थीं. इसके बाद गांव में भूत-प्रेत की अफवाह फैल गई. कुछ लोगों ने इसे अलौकिक घटना बताया, जबकि एक ओझा द्वारा भी ऐसी बातें कहे जाने से ग्रामीणों का डर और बढ़ गया. बाद में कुछ बच्चे विद्यालय लौटे भी, लेकिन पहले ही दिन एक छात्रा के फिर बेहोश हो जाने के बाद सभी बच्चे घबराकर वापस घर चले गए. इसके बाद से विद्यालय पूरी तरह खाली पड़ा है.
प्रशासन की अपील- अंधविश्वास छोड़ें, बच्चों का भविष्य बचाएं
शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन लगातार ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटे हैं. अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक सोच, सामुदायिक जागरूकता और सकारात्मक माहौल से ही इस समस्या का समाधान संभव है. लगातार 18 दिनों से विद्यालय में पढ़ाई बंद रहने से 85 छात्र-छात्राओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है. प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अफवाहों और अंधविश्वास पर विश्वास न करें तथा बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजकर उनके भविष्य को सुरक्षित करें.
