पीएचईडी को हैंडओवर के बाद भी ठप पड़ी नल-जल योजना, पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण

Kaimur News: कैमूर जिले के रामपुर प्रखंड की पसाई पंचायत के पसाई गांव वार्ड नंबर-1 और 2 और बेलांव पंचायत के अकोढ़ी गांव में नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है. पंचायती राज विभाग द्वारा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) को यह योजना हैंडओवर किए जाने के तीन-चार महीने बाद भी पेयजलापूर्ति बंद है.

Kaimur News (रामपुर से राजू कुमार की रिपोर्ट ) :
प्रखंड की पसाई पंचायत के पसाई गांव वार्ड नंबर-1 एवं 2 और बेलांव पंचायत के अकोढ़ी गांव में नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है. पंचायती राज विभाग ने यह योजना लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) को हैंडओवर कर दी, लेकिन तीन-चार महीने से पेयजलापूर्ति बंद है. हैंडओवर के समय भी ग्रामीण पानी की कमी झेल रहे थे, आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल का जल योजना यहां कागजों तक सिमट कर रह गई है. पीएचईडी को हैंडओवर के बाद भी न तो लीकेज ठीक हुआ, न नल जल की स्थिति सुधरी.

100 घरों का लक्ष्य, 15 घरों में भी बंद हुई सप्लाई

ग्रामीणों के अनुसार, अकोढ़ी गांव में 100 से अधिक घरों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य था, लेकिन शुरुआत में मात्र 10 से 15 घरों में ही सप्लाई हो पाती थी. अब वह भी पूरी तरह बंद है. ग्रामीण त्रिवेणी दुबे, विकास सिंह, रविशंकर दुबे, धारिक्ष दुबे और सीताराम बिंद ने बताया कि पाइप फटने की समस्या बनी हुई है. मरम्मत न होने से योजना बेकार हो गई है. ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया, फिर भी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पीएचईडी को हैंडओवर के बाद जलापूर्ति सुधरेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

पसाई के वार्ड-2 में मरम्मत के अभाव में बंद

पसाई वार्ड संख्या-2 के वार्ड सदस्य अजय राम ने बताया कि उनके वार्ड का नल-जल मरम्मत के अभाव में बंद है. उन्होंने पीएचईडी जेई से दर्जनों बार फोन पर और प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी से मौखिक शिकायत की, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ. विभाग की लापरवाही से ग्रामीण काफी नाराज हैं.

चापाकल के भरोसे गरीब परिवार

पसाई वार्ड-1 की नल-जल योजना का भी यही हाल है. मरम्मत के अभाव में सात-आठ महीने से योजना बंद पड़ी है. वर्तमान में ग्रामीण चापाकल के पानी पर निर्भर हैं. कुछ घरों में सबमर्सिबल लगे हैं, लेकिन गरीब परिवारों के लिए वह भी संभव नहीं. चापाकल से पानी की उपलब्धता भी मौसम पर निर्भर करती है. गर्मी में जलस्तर गिरने से संकट और बढ़ जाता है. भीषण गर्मी में पेयजल संकट से लोग परेशान हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की है.

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By Kumarsuryakant

सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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