Kaimur News : अमित कुमार सिन्हा की रिपोर्ट : बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए देश भर में विख्यात है. यहां कई प्राचीन और प्रसिद्ध देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जिनमें सबसे प्रमुख भगवानपुर की पवरा पहाड़ी पर स्थित आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी का मंदिर है. ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध इस बेहद प्राचीन मंदिर में ग्रीष्म ऋतु (गर्मी के मौसम) के नियमों के अनुसार पूजा और आरती का समय निर्धारित किया गया है.
10 जून को हुआ विशेष श्रृंगार, उमड़े श्रद्धालु
मंदिर के मुख्य पुजारी उमेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि आज 10 जून, बुधवार को सुबह 6.00 बजे मंदिर के कपाट खोले गए. इसके बाद गर्भगृह की पूरी विधि-विधान से साफ-सफाई की गई. सुबह 6.30 बजे घंटे-घड़ियाल और शंखध्वनि के बीच माता की भव्य आरती की गई और उन्हें विशेष भोग लगाया गया. इस सुबह की आरती और आराधना के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे. इसके साथ ही, मंदिर में स्थापित चमत्कारी पंचमुखी शिवलिंग की भी विशेष पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई.
तांडुलम है माता का मुख्य प्रसाद
मां मुंडेश्वरी देवी का यह मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. मुख्य पुजारी के अनुसार, शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी मंदिर में ‘तांडुलम’ (तुलसी दल मिश्रित अक्षत) को मुख्य प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाता है.
गर्मी के मौसम में यह है आरती की समय-सारणी
माता मुंडेश्वरी मंदिर धार्मिक न्यास के सचिव गोपाल जी प्रसाद ने जानकारी दी कि ऋतुओं के बदलते प्रभाव के अनुसार मंदिर में पूजा और आरती का समय तय किया जाता है. वर्तमान में ग्रीष्m ऋतु के तहत आरती का समय इस प्रकार है:
सुबह की आरती: 06.30 बजे (भोग और आराधना के साथ)
दोपहर की आरती: 11.30 बजे
संध्या आरती: 06.30 बजे
इन तीनों समय होने वाली विशेष आरती में दर्शन के लिए स्थानीय भक्तों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
नवरात्र में जुटती है लाखों की भीड़
पवरा पहाड़ी पर स्थित माता का यह ऐतिहासिक मंदिर अति प्राचीन और सुविख्यात है. यही कारण है कि हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर यहां देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजन के लिए कैमूर पहुंचते हैं.
