Kaimur News : शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी के विराट रूप की हुई सुबह-सुबह आराधना, जुटे रहे श्रद्धालु

Kaimur News बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरे देश में एक विशिष्ट पहचान रखता है. इसी पावन भूमि पर स्थित है भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी मंदिर

Kaimur News : अमित कुमार सिन्हा की रिपोर्ट : बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरे देश में एक विशिष्ट पहचान रखता है. इसी पावन भूमि पर स्थित है भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी मंदिर. भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने माता की दिव्य आरती और पूजा-अर्चना के समय में विशेष बदलाव किया है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता हो सके .

धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध बिहार के कैमूर जिले में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. यहां कई सुप्रसिद्ध देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जिनमें भगवानपुर के पवरा पहाड़ी पर स्थापित ‘आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी मंदिर’ सर्वप्रमुख है . वर्तमान में ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ ही मंदिर में सुबह की आरती का समय सुबह 6.00 बजे निर्धारित किया गया है .

मंदिर के मुख्य पुजारी उमेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि शनिवार को भोर में ठीक 6.00 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद पूरे गर्भगृह की श्रद्धापूर्वक साफ-सफाई की गई . इसके उपरांत, सुबह 6.30 बजे शंखनाद, घण्टे-घड़ियाल और मंत्रोच्चार के बीच माता की भव्य आरती की गई और उन्हें विशेष भोग लगाया गया . इस पावन अवसर पर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में बाहरी पर्यटक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने माता का आशीर्वाद लिया . शनिवार के विशेष संयोग पर मंदिर परिसर में स्थापित प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग की भी विशेष पूजा और विधि-विधान से आरती संपन्न की गई .

ऋतुओं के अनुसार बदलता है आरती का समय

माता मुंडेश्वरी मंदिर धार्मिक न्यास के सचिव गोपाल जी प्रसाद ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की . उन्होंने बताया कि मौसम और ऋतुओं के बदलाव के अनुसार मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती का समय तय किया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो . मुख्य पुजारी के अनुसार, वर्तमान ग्रीष्म ऋतु के टाइम-टेबल के तहत मंदिर में दिनभर में तीन मुख्य आरतियां आयोजित की जा रही हैं:

प्रथम आरती (सुबह): प्रातः 6.30 बजे (कपाट खुलने और सफाई के बाद) .

द्वितीय आरती (दोपहर): अपराह्न 11.30 बजे .

तृतीय आरती (संध्या): शाम 6.30 बजे .

तांडुलम प्रसाद और नवरात्र का विशेष महत्व 

इस ऐतिहासिक शक्तिपीठ की अपनी कुछ अनूठी परंपराएं हैं . यहाँ आने वाले भक्तों को मुख्य प्रसाद के रूप में ‘तांडुलम’ (विशेष अक्षत/चावल का प्रसाद) वितरित किया जाता है, जिसे बेहद चमत्कारी और पवित्र माना जाता है . पवरा पहाड़ी की सुरम्य वादियों में स्थित माता का यह मंदिर न केवल अति प्राचीन है, बल्कि इसकी वास्तुकला और आध्यात्मिक ऊर्जा भी सुविख्यात है . यही कारण है कि हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहाँ देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता मुंडेश्वरी के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं .

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: JITENDRA KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >