भगवानपुर से पंकज सिंह की रिपोर्ट:
Kaimur News: कैमूर जिले के भगवानपुर-मुंडेश्वरी पथ पर स्थित सुवर्णा नदी (सुवरन नदी) का पुल इन दिनों बदहाली के आंसू बहा रहा है. यह पुल हर दिन भीषण जाम की मार झेल रहा है, जिससे सुबह से लेकर देर रात तक इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहता है. जहां एक तरफ भगवानपुर बाजार के रास्ते होकर प्रसिद्ध माता मुंडेश्वरी धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के पहिए इस नदी पुल के पास आकर थम जाते हैं, वहीं आम यात्री भी इस जाम की गंभीर समस्या से लगातार जूझ रहे हैं.
खासकर शादी-विवाह के सीजन में इस मार्ग पर जाम का रूप बेहद विकराल हो जाता है. वाहनों का परिचालन काफी बढ़ जाने के कारण बारात और तिलकोत्सव में शामिल होने वाले लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते हैं. इस दौरान ससमय पहुंचने की आपाधापी में लोग एक-दूसरे से धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट करने पर भी उतारू हो जाते हैं.
सिंचाई विभाग ने छोटी गाड़ियों के लिए बनाया था पुल
जाम लगने की मुख्य वजह इस पुल का अत्यधिक संकरा होना है. सिंचाई विभाग के पूर्व कर्मी वंशी मल्लाह और स्थानीय समाजसेवी योगेन्द्र प्रसाद सिंह उर्फ नेता जी के अनुसार, विभाग द्वारा नदी के ऊपर इस पुल का निर्माण सन् 1975 में कराया गया था. उस समय इस पुल के निर्माण का मुख्य उद्देश्य सोन उच्चस्तरीय नहर के पानी को भगवानपुर क्षेत्र से पश्चिमी और उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र के खेतों में सिंचाई के लिए पहुंचाना था.
सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने तब इस पुल की रूपरेखा इस तरह तैयार की थी कि कोई भी बड़ा वाहन पुल पर न चढ़ सके. इसे केवल पैदल यात्रियों और छोटी गाड़ियों के परिचालन के लिए बनाया गया था. इसके बावजूद, तजुर्बेकार ड्राइवर बड़ी-बड़ी ओवरलोडेड कमर्शियल गाड़ियों को अपने अनुभव के बल पर जबरदस्ती इस पुल से पार कराते हैं. यह लापरवाही पुल को कमजोर करने के साथ-साथ हर दिन जाम का मुख्य कारण बन रही है.
पुल में दरारें, सुरक्षा दीवारें भी टूटीं
करीब पांच दशक पूर्व बना यह पुल वर्तमान में अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है. भारी और ओवरलोडेड वाहनों के लगातार आवागमन से पुल के विभिन्न हिस्सों में गहरी दरारें उभर आई हैं. कमर्शियल वाहनों के धक्कों से पुल की सुरक्षा दीवारें भी कई जगहों से टूट चुकी हैं. अब आलम यह है कि कई गांवों, जिलों और राज्यों को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण पुल कब ढह जाए, इस बारे में कुछ भी कह पाना बेहद मुश्किल है.
पुल टूटा तो यूपी और रोहतास सहित दर्जनों गांवों का टूट जाएगा संपर्क
व्यापारिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोण से यह पुल बेहद महत्वपूर्ण है. यह पुल भगवानपुर प्रखंड के पश्चिमी हिस्से के गांवों, चैनपुर व चांद प्रखंड के अलावा रोहतास जिला, यूपी के चंदौली जनपद और पहाड़ी क्षेत्र के अंतर्गत यूपी के सोनभद्र जनपद के लोगों को जोड़ता है. साथ ही माता मुंडेश्वरी धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यही एकमात्र मुख्य रास्ता है.
यदि किसी कारणवश यह पुल टूट जाता है, तो दर्शनार्थियों और व्यापारियों को भारी दिक्कत होगी. खासकर भगवानपुर प्रखंड के पहाड़ी इलाके से सटे गांवों जैसे मसहीं, सरैयां, उमापुर, रामगढ़, कुड़वां, पड़री-पतलोईयां, बजडिहवां, चुआं, मकरीखोह और मातर आदि के ग्रामीणों के लिए भगवानपुर बाजार से रोजमर्रा का सामान जुटाना और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेना असंभव हो जाएगा.
धार्मिक न्यास की बैठक में तत्कालीन डीएम ने कही थी नए पुल की बात
एक चैत्र नवरात्र से ठीक पहले मेले को सफल बनाने के लिए कैमूर के तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी और मुंडेश्वरी न्यास समिति के सचिव अशोक कुमार सिंह के संयुक्त नेतृत्व में पर्यटन विश्राम गृह (आईबी) के सभागार में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी. इस बैठक में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुवर्णा नदी के इस संकरे पुल की बदहाली पर गहन चर्चा हुई थी. उस समय तत्कालीन डीएम ने यहाँ एक अतिरिक्त नया पुल बनाने के लिए पुल निर्माण विभाग को पत्र लिखने की बात कही थी.
तब से लेकर अब तक स्थानीय लोगों के बीच नए पुल के निर्माण की चर्चा तो बार-बार होती है, लेकिन कागजी प्रक्रिया वर्तमान में किस स्तर पर है, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी को नहीं है. बता दें कि आईएएस डॉ नवल किशोर चौधरी का कैमूर डीएम के रूप में कार्यकाल वर्ष 2018 से 2021 तक रहा था.
मामले पर क्या कहती हैं बीडीओ
इस संबंध में जब भगवानपुर की प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अंकिता शेखर से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि भगवानपुर-मुंडेश्वरी पथ को जोड़ने वाले सुवर्णा नदी पर अतिरिक्त पुल निर्माण के विषय में उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. इस तरह का कोई भी पत्र या दिशा-निर्देश अब तक उनके कार्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है.
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