जिले में बिक रहे हैं बिना हॉलमार्क के आभूषण, ग्राहक अनजान

KAIMUR NEWS.भारतीय समाज और परंपरा में आभूषणों का विशेष महत्व है. हर तबके के लोगों को आभूषणों से लगाव होता है और खुशी के अवसर पर लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार इसकी खरीदारी करते हैं. लेकिन, कई बार लोग आभूषण खरीदते समय मिलावट और ठगी का शिकार हो जाते हैं.

जिले में हॉलमार्क की सुविधा नहीं है उपलब्ध, छोटे दुकानदारों को होती है परेशानी

हॉलमार्क नहीं होने से ठगी और मिलावट का खतरा

छोटे दुकानदारों को बाहर जाकर करानी पड़ती है हॉलमार्किंग

भभुआ सदर.

भारतीय समाज और परंपरा में आभूषणों का विशेष महत्व है. हर तबके के लोगों को आभूषणों से लगाव होता है और खुशी के अवसर पर लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार इसकी खरीदारी करते हैं. लेकिन, कई बार लोग आभूषण खरीदते समय मिलावट और ठगी का शिकार हो जाते हैं. ठगी और मिलावट से बचाने के लिए सरकार ने आभूषणों की बिक्री पर हॉलमार्क अनिवार्य कर दिया है. इसके बावजूद जिले में नाममात्र के बड़े दुकानदार ही हॉलमार्क वाले आभूषण बेच रहे हैं. अभी भी बिना हॉलमार्क के आभूषणों की खरीद-बिक्री जारी है. इसको लेकर ग्राहकों में भी जागरूकता की कमी है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले खरीदार हॉलमार्क के बारे में पूरी तरह जानकारी नहीं रखते, जिसके कारण वे बिना हॉलमार्क के ही आभूषण खरीद लेते हैं.दुकानदारों का कहना है कि जिले में हॉलमार्क लगाने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है. यहां के कारीगरों और दुकानदारों को आभूषणों पर हॉलमार्क लगवाने के लिए बाहर जाना पड़ता है. एक-दो पीस आभूषण पर हॉलमार्क नहीं होने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है.

हॉलमार्क वाले गहनों की रहती है विश्वसनीयता

बता दें कि हॉलमार्क एक आधिकारिक गुणवत्ता प्रमाण है, जो सोने और चांदी के गहनों पर लगाया जाता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि गहना जितने कैरेट का बताया जा रहा है, उतना ही शुद्ध है. भारत में यह प्रमाण ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स द्वारा दिया जाता है. आसान शब्दों में, यदि ग्राहक 22 कैरेट सोना खरीद रहा है, तो हॉलमार्क यह गारंटी देता है कि वह वास्तव में 22 कैरेट ही है. हॉलमार्क वाले गहनों पर बीआइएस का लोगो, कैरेट या शुद्धता (जैसे 22के, 18के), हॉलमार्किंग सेंटर का निशान और ज्वेलर की पहचान अंकित रहती है. इससे नकली या कम शुद्ध सोने से बचाव होता है, सही कीमत का भरोसा मिलता है और भविष्य में बेचने या बदलने में आसानी होती है.

हॉलमार्किंग की सुविधा देने की मांग

शहर के पश्चिम बाजार स्थित अमित ज्वेलर्स के प्रोपराइटर अमित सेठ ने बताया कि जिले में अब तक हॉलमार्किंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है. छोटे कारीगरों और दुकानदारों को इसके लिए बाहर जाना पड़ता है, जहां कम संख्या में गहनों पर हॉलमार्क कराने में दिक्कत होती है.रस्तोगी आभूषण भंडार के राजू रस्तोगी ने कहा कि सरकार को नियम बनाने के साथ-साथ सुविधा भी उपलब्ध करानी चाहिए. उनके अनुसार बड़े दुकानदारों को ज्यादा परेशानी नहीं होती, लेकिन छोटे दुकानदारों के सामने कई समस्याएं खड़ी हो जाती हैं.

ग्राहकों में जागरूकता का अभाव

सरकार ने एक अप्रैल 2023 से हॉलमार्क वाले आभूषणों की बिक्री अनिवार्य कर दी है, लेकिन जिले में अधिकांश ग्राहकों को इसकी जानकारी नहीं है. शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग दुकानदार के भरोसे ही खरीदारी कर रहे हैं. ग्राहक भूपेंद्र पटेल और मिथलेश कुमार ने बताया कि वे उसी दुकान से आभूषण खरीदते हैं, जहां से उनके परिवार के लोग पहले से खरीदते आये हैं. उन्हें हॉलमार्क की जानकारी नहीं है. वहीं, जागरूक ग्राहक संजय सिंह और मंजय दुबे ने कहा कि वे खरीदारी से पहले हॉलमार्क अवश्य देखते हैं, जिससे धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vikash kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
Tags
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >