Kaimur News : कैमूर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के आदेश के बावजूद राशि का भुगतान नहीं करने पर इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ की गयी सख्ती का असर शुक्रवार को देखने को मिला. कंपनी ने दुर्गावती प्रखंड के कुड़ारी निवासी प्रोपराइटर अमित अग्रवाल को ब्याज सहित करीब 61 लाख रुपये का भुगतान किया. जिला उपभोक्ता आयोग के सदस्य नरेश चंद्र द्विवेदी ने कंपनी की ओर से जारी चेक प्रोपराइटर को सौंपा.
टैंक की दीवार फटने से बह गया था लाखों का तेल
मामला दुर्गावती प्रखंड के कुड़ारी में राइस ब्रान ऑयल बनाने वाली मशीन और उससे जुड़े टैंक का है. टैंक की बाहरी दीवार फट जाने के कारण उसमें रखा राइस ब्रान ऑयल बह गया था. इससे प्रोपराइटर अमित अग्रवाल को काफी आर्थिक नुकसान हुआ. क्षतिपूर्ति की मांग को लेकर उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया था.
आयोग ने 49 लाख रुपये से अधिक भुगतान का दिया था आदेश
मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को 49 लाख 861 रुपये हर्जाने के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया था. इसके साथ ही शारीरिक एवं मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 15 हजार रुपये और वाद खर्च के रूप में पांच हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया था. आयोग ने निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का अनुपालन करने को कहा था.
दो माह तक भुगतान नहीं, फिर जारी हुआ नॉन बेलेबल वारंट
आयोग के आदेश के बावजूद इंश्योरेंस कंपनी ने निर्धारित दो माह की अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया. इसके बाद आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट जारी किया. कार्रवाई के बाद कंपनी की ओर से प्रोपराइटर को राशि का भुगतान किया गया.
सात प्रतिशत ब्याज से बढ़ गयी भुगतान की राशि
कंपनी ने मूल हर्जाने की राशि के साथ सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भी भुगतान किया. ब्याज के रूप में करीब 11 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि बनी. इस तरह मूल हर्जाना, क्षतिपूर्ति, वाद खर्च और ब्याज को मिलाकर प्रोपराइटर को करीब 61 लाख रुपये का भुगतान किया गया.
आयोग ने चेक सौंपकर कराया आदेश का अनुपालन
शुक्रवार को जिला उपभोक्ता आयोग के सदस्य नरेश चंद्र द्विवेदी ने अमित अग्रवाल को इंश्योरेंस कंपनी का चेक सौंपा. राशि का भुगतान होने के साथ ही आयोग के आदेश का अनुपालन पूरा हुआ. कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया कि उपभोक्ता आयोग के आदेश का निर्धारित समय में पालन नहीं करने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
